सरकारी अस्पतालों में शाम की ओपीडी की तैयारी, डॉक्टरों को एक्स्ट्रा इनकम तो मरीजों को राहत..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और सीमित ओपीडी समय की समस्या को दूर करने के लिए सरकार नई व्यवस्था पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत सरकारी अस्पतालों में शाम के समय भी ओपीडी संचालित करने और इच्छुक सरकारी डॉक्टरों को उसी अस्पताल में सशर्त प्रैक्टिस की अनुमति देने की तैयारी है। हालांकि, व्यवस्था लागू करने से पहले इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि शाम की ओपीडी शुरू होने से उन मरीजों को राहत मिल सकती है, जो नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से दिन के समय अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
अस्पताल से बाहर प्रैक्टिस की अनुमति नहीं
प्रस्तावित व्यवस्था में सबसे अहम शर्त यह होगी कि सरकारी डॉक्टरों को अस्पताल की चारदीवारी के बाहर निजी क्लीनिक या आवास पर मरीज देखने की अनुमति नहीं होगी। जो डॉक्टर शाम की ओपीडी में शामिल होंगे, उन्हें सरकारी अस्पताल में ही मरीजों का परामर्श देना होगा। फिलहाल सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सकों के लिए निजी प्रैक्टिस पर रोक है। इसके बदले उन्हें नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) दिया जाता है। सरकार अब इस व्यवस्था में बदलाव के विकल्प पर विचार कर रही है, ताकि डॉक्टरों की विशेषज्ञ सेवाओं का इस्तेमाल सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में ही किया जा सके। शाम की ओपीडी में मरीजों से ली जाने वाली फीस को लेकर भी नियम तय किए जाने की संभावना है। डॉक्टरों को मनमानी फीस वसूलने की अनुमति नहीं होगी। प्रस्तावित मॉडल में परामर्श शुल्क को न्यूनतम रखने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों की तुलना में कम खर्च में विशेषज्ञ चिकित्सक की सुविधा मिल सके। योजना का उद्देश्य केवल डॉक्टरों को अतिरिक्त आय का अवसर देना नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मानव संसाधन और चिकित्सा सुविधाओं का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना भी है।
ऑपरेशन और आगे का इलाज सरकारी अस्पताल में
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि शाम की ओपीडी में परामर्श लेने वाले मरीज को ऑपरेशन या आगे के उपचार की जरूरत पड़ती है तो उसका इलाज सरकारी अस्पताल में ही किए जाने पर जोर रहेगा। डॉक्टर मरीज को ऑपरेशन के लिए अपने निजी अस्पताल या किसी अन्य निजी संस्थान में भेज नहीं सकेंगे। दवाओं को लेकर भी व्यवस्था में स्पष्ट नियम बनाए जाने की संभावना है। मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं और निर्धारित उपचार व्यवस्था को प्राथमिकता देने की कोशिश होगी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पहले से चुनौती बनी हुई है। कई सरकारी अस्पतालों में निर्धारित ओपीडी समय समाप्त होने के बाद मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि शाम की ओपीडी शुरू होने से अस्पतालों की इमारत, जांच सुविधाओं और अन्य संसाधनों का अधिक समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इसका लाभ नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और उन परिवारों को भी मिल सकता है, जिनके लिए दिन में अस्पताल पहुंचना मुश्किल होता है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में यदि विशेषज्ञ चिकित्सक शाम तक उपलब्ध रहते हैं तो मरीजों को उपचार के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है। प्रस्तावित मॉडल में शाम की प्रैक्टिस को सभी सरकारी डॉक्टरों के लिए अनिवार्य करने की योजना नहीं है। निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत जो चिकित्सक अतिरिक्त समय में मरीज देखना चाहेंगे, उन्हें ही इसका हिस्सा बनाए जाने की संभावना है। इसके लिए डॉक्टरों के काम के घंटे, मरीजों की संख्या, परामर्श शुल्क और उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जा सकते हैं। साथ ही यह भी तय करना होगा कि शाम की ओपीडी के दौरान मिलने वाली फीस का रिकॉर्ड कैसे रखा जाएगा और उसकी निगरानी किस स्तर पर होगी।
नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में सरकार के सामने निगरानी की बड़ी चुनौती भी रहेगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि डॉक्टर नियमित सरकारी ड्यूटी के दौरान शाम की प्रैक्टिस के मरीजों को प्राथमिकता न दें। दवाओं, जांच, ऑपरेशन और मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया को भी पारदर्शी रखना होगा। एक सरकारी चिकित्सक के अनुसार, व्यवस्था का लाभ तभी मिलेगा जब नियमित ड्यूटी और अतिरिक्त ओपीडी के समय को स्पष्ट रूप से अलग किया जाए। साथ ही फीस और मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी होगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद तस्वीर होगी साफ
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा की गई है। सरकार अब प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शाम की ओपीडी की व्यवस्था किन सरकारी अस्पतालों में लागू होगी, डॉक्टरों के लिए क्या शर्तें होंगी, मरीजों से कितना शुल्क लिया जाएगा और निगरानी की प्रक्रिया किस तरह काम करेगी। सरकार की कोशिश है कि सरकारी डॉक्टरों की विशेषज्ञ सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल हो और मरीजों को कम खर्च में उपचार की सुविधा मिल सके। हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नियम कितने स्पष्ट बनाए जाते हैं और उनके पालन की निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।

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