मैस्कॉट-स्लोगन के जरिए एमडीडीए की पहचान को नया स्वरूप, प्रतिभागियों को मिला मंच..
उत्तराखंड: मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अपनी संस्थागत पहचान को आम लोगों की रचनात्मक सोच से जोड़ने की दिशा में नई पहल की है। प्राधिकरण की ओर से आयोजित मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया गया। एमडीडीए कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। समारोह में संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार समेत प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी, प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागी और विजेता मौजूद रहे।
लोगों की रचनात्मक सोच को पहचान से जोड़ने की पहल
एमडीडीए की ओर से यह प्रतियोगिता 3 अगस्त से 16 अगस्त तक आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य प्राधिकरण के लिए केवल एक नया मैस्कॉट या स्लोगन चुनना नहीं, बल्कि आम लोगों की कल्पनाशीलता और विचारों के माध्यम से संस्था की सोच को सामने लाना था। प्रतियोगिता के जरिए युवाओं, कलाकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं को एमडीडीए की पहचान को अपनी नजर से परिभाषित करने का अवसर दिया गया। प्राप्त प्रविष्टियों में प्रतिभागियों ने प्राधिकरण के काम, विकास की अवधारणा और जनसरोकारों को अलग-अलग रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। प्राधिकरण का मानना है कि किसी संस्था की पहचान केवल उसके कार्यालय, योजनाओं या परियोजनाओं से नहीं बनती। उससे जुड़े लोगों की भागीदारी और उनके विचार भी उसकी पहचान को व्यापक रूप देते हैं। इसी उद्देश्य से प्रतियोगिता के माध्यम से जनता को सीधे जोड़ने का प्रयास किया गया।
स्नेहा भंडारी का मैस्कॉट रहा प्रथम
मैस्कॉट डिज़ाइन प्रतियोगिता में स्नेहा भंडारी ने पहला स्थान हासिल किया। उन्हें पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया गया। वहीं अनुराग रमोला को द्वितीय पुरस्कार मिला, जिसके तहत उन्हें 30 हजार रुपये प्रदान किए गए। अंकिता बिष्ट ने तीसरा स्थान प्राप्त किया और उन्हें 15 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत को प्रथम स्थान मिला। उन्हें 10 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मैस्कॉट और स्लोगन से सामने आएगी संस्थागत सोच
एमडीडीए की इस पहल के पीछे उद्देश्य अपनी कार्यप्रणाली और भविष्य की दिशा को ऐसे प्रतीकों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना भी है, जिन्हें आसानी से समझा और याद रखा जा सके। मैस्कॉट जहां किसी संस्था को दृश्य पहचान देने का माध्यम बन सकता है, वहीं स्लोगन उसके विचार और उद्देश्य को कम शब्दों में लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है। प्रतियोगिता में मिली प्रविष्टियों ने यह भी दिखाया कि विकास प्राधिकरण जैसे संस्थानों को लेकर आम लोगों और युवाओं के बीच अपनी कल्पनाएं और विचार मौजूद हैं। मंच मिलने पर इन्हें रचनात्मक रूप में सामने लाया जा सकता है।
जनभागीदारी और नवाचार पर जोर
कार्यक्रम के दौरान एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने सभी विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में सामने आई रचनात्मकता लोगों की सोच और प्राधिकरण से उनके जुड़ाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि एमडीडीए की कोशिश विकास कार्यों के साथ जनभागीदारी और नवाचार को भी आगे बढ़ाने की है। कार्यक्रम में प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की भी सराहना की गई। विजेताओं के सम्मान के साथ आयोजित यह कार्यक्रम प्राधिकरण की पहचान को जनता की रचनात्मकता से जोड़ने की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया। प्रतियोगिता के माध्यम से तैयार किए गए मैस्कॉट और स्लोगन को आगे एमडीडीए की पहचान और संचार व्यवस्था में किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा, इस दिशा में भी आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

More Stories
रेट लिस्ट और स्टॉक रजिस्टर की जांच, ओवररेटिंग मिलने पर प्रशासन ने कसा शिकंजा..
हरिद्वार में लौटेगी सिटी बस सेवा की रौनक, AC इलेक्ट्रिक बसों से कुंभ से पहले शुरू होगा संचालन..
मिलेट्स खरीद से मजबूत होगी पहाड़ी खेती, किसानों से सीधे खरीदी जाएगी पारंपरिक उपज..