October 1, 2026

हरिद्वार में लौटेगी सिटी बस सेवा की रौनक, AC इलेक्ट्रिक बसों से कुंभ से पहले शुरू होगा संचालन..

हरिद्वार में लौटेगी सिटी बस सेवा की रौनक, AC इलेक्ट्रिक बसों से कुंभ से पहले शुरू होगा संचालन..

 

 

 

 

उत्तराखंड: हरिद्वार शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में हरिद्वार को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। करीब 35 साल के लंबे अंतराल के बाद शहर में सिटी बस सेवा दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत हरिद्वार के लिए 37 इलेक्ट्रिक सिटी बसें स्वीकृत की गई हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शहर के साथ-साथ आसपास के प्रमुख क्षेत्रों को भी सिटी बस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों ने बसों के संचालन से पहले रूट, स्टॉपेज और चार्जिंग व्यवस्था को लेकर जमीनी सर्वे शुरू कर दिया है। लक्ष्य आगामी कुंभ मेले से पहले संचालन व्यवस्था को तैयार करना बताया जा रहा है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक सिटी बसों का संचालन सप्तऋषि क्षेत्र से शुरू किया जाएगा। यहां से बसें शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए लालढांग, बहादराबाद, पतंजलि योगपीठ और रोशनाबाद तक जाएंगी। इस नेटवर्क के जरिए शहर के भीतर आवाजाही के साथ उन क्षेत्रों को भी जोड़ने का प्रयास होगा, जहां वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं। अधिकारियों के स्तर पर रूट और बसों के संचालन का समय तय करने की प्रक्रिया चल रही है। यात्रियों की जरूरत और प्रमुख आवागमन वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए स्टॉपेज निर्धारित किए जाएंगे।

रोडवेज वर्कशॉप के पास बनेगा चार्जिंग स्टेशन
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए चार्जिंग सुविधा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए हरिद्वार रोडवेज वर्कशॉप के नजदीक उपलब्ध खाली जमीन पर चार्जिंग प्वाइंट विकसित करने की तैयारी की जा रही है। बसों की संख्या और प्रस्तावित रूट को देखते हुए चार्जिंग व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जाएगा, जिससे संचालन के दौरान बसों को पर्याप्त चार्जिंग सुविधा उपलब्ध हो सके।

1991 में बंद हो गई थी सिटी बस सेवा
हरिद्वार में सिटी बसों का इतिहास नया नहीं है। राज्य गठन से पहले शहर में सिटी बसों का संचालन होता था। 1991 के आसपास सेवा बंद होने के बाद शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। उस दौर में सप्तऋषि, हरिद्वार शहर, कनखल, भेल और रोशनाबाद समेत कई क्षेत्रों के बीच लोगों को बस सेवा उपलब्ध थी। नौकरी, कारोबार, स्कूल-कॉलेज और अन्य जरूरी कामों के लिए बड़ी संख्या में लोग इन बसों का इस्तेमाल करते थे।पुराने समय में कम किराए में शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचना संभव था। सिटी बस सेवा बंद होने के बाद धीरे-धीरे सार्वजनिक परिवहन का भार छोटे यात्री वाहनों पर बढ़ता गया।

ऑटो-विक्रम और ई-रिक्शा पर बढ़ी निर्भरता
सिटी बस सेवा बंद होने के बाद हरिद्वार में ऑटो, विक्रम और बैटरी रिक्शा जैसे वाहनों की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में शहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे यात्री वाहन संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इन वाहनों की उपलब्धता के बावजूद यात्रियों को रूट और किराए से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगह नियमित समय-सारिणी नहीं होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अलग-अलग साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा शुरू होने की योजना को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्तावित सिटी बस सेवा की एक खास बात यह होगी कि यात्रियों को एसी इलेक्ट्रिक बसों में सफर करने का विकल्प मिलेगा। इससे शहर में पर्यावरण के लिहाज से भी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर में स्थानीय आबादी के साथ बड़ी संख्या में बाहरी यात्री भी पहुंचते हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख हिस्सों को एक व्यवस्थित बस नेटवर्क से जोड़ने से यात्रियों को परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

कुंभ से पहले व्यवस्था शुरू करने की तैयारी
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मिली 37 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की तैयारियों को आगामी कुंभ मेले से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों की ओर से रूट सर्वे और अन्य तकनीकी तैयारियां की जा रही हैं। यदि प्रस्तावित समय के अनुसार व्यवस्था तैयार होती है तो कुंभ से पहले हरिद्वार की सड़कों पर एक बार फिर सिटी बसें नजर आ सकती हैं। करीब साढ़े तीन दशक बाद लौटने वाली यह सेवा शहर की बढ़ती आबादी और यातायात दबाव के बीच सार्वजनिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।