October 12, 2026

उत्तराखंड के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान..

उत्तराखंड के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान..

जियोथर्मल पूल से आकर्षित होंगे पर्यटक..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौजूद प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत अब पर्यटन विकास के नए केंद्र बन सकते हैं। राज्य सरकार इन स्रोतों का इस्तेमाल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। इसी योजना के तहत पिथौरागढ़ जिले के मदकोट में जियोथर्मल पूल विकसित करने की तैयारी की जा रही है। यहां पर्यटकों को प्राकृतिक गर्म पानी में स्नान करने के साथ ठहरने की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए कॉटेज और अन्य पर्यटक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रदेश में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स यानी प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी रहे हैं। अब सरकार की कोशिश है कि इन प्राकृतिक संसाधनों का व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए। यदि मदकोट में प्रस्तावित योजना सफल रहती है, तो राज्य के अन्य उपयुक्त गर्म पानी के स्रोतों को भी पर्यटन सुविधाओं के रूप में विकसित करने का रास्ता खुल सकता है। इससे नए पर्यटन स्थल विकसित होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

मदकोट में विकसित होंगी आधुनिक पर्यटक सुविधाएं
पिथौरागढ़ जिले का मदकोट प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों के लिए जाना जाता है। यहां मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग के पानी को पर्यटकों के लिए स्नान की सुविधा विकसित करने में इस्तेमाल करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना के तहत गर्म पानी के स्रोत के आसपास जियोथर्मल पूल बनाया जाएगा। इसके अलावा पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना में महिला और पुरुष पर्यटकों के लिए अलग-अलग स्नान स्थल बनाने का भी प्रस्ताव शामिल है। इससे पर्यटकों को व्यवस्थित और सुविधाजनक तरीके से प्राकृतिक गर्म पानी में स्नान करने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, परियोजना शुरू करने से पहले पानी की गुणवत्ता, तापमान और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। पर्यटन विभाग इस दिशा में वैज्ञानिक संस्थानों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से किया जा सके। पानी की जांच और जरूरी तकनीकी पहलुओं का आकलन करने के बाद ही परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

उत्तराखंड में चिह्नित किए गए हैं 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स
उत्तराखंड में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों की अच्छी संख्या मौजूद है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से किए गए अध्ययन के अनुसार, राज्य में 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स की पहचान की गई है। इसके अलावा भी कई ऐसे स्रोत हो सकते हैं, जिन्हें अभी तक चिह्नित नहीं किया गया है।
वैज्ञानिकों के अध्ययन में कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में गोरी गंगा नदी के आसपास मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। यहां करीब 13 किलोमीटर के क्षेत्र में गर्म पानी के स्रोतों की एक बेल्ट मौजूद है। इस क्षेत्र में कई जियोथर्मल स्प्रिंग्स हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किए जाने की संभावनाएं हैं। इन स्रोतों की भौगोलिक स्थिति और आसपास की परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। खास बात यह है कि कुछ स्थानों पर गर्म पानी के स्रोत अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले और समतल क्षेत्रों में मौजूद हैं। ऐसे स्थानों पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करना अपेक्षाकृत व्यावहारिक हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक स्थान पर उपलब्ध पानी की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर ही उपयोग की योजना तैयार करनी होगी।

बिजली उत्पादन के अलावा भी उपयोगी हैं प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत
जियोथर्मल स्प्रिंग्स का महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों का इस्तेमाल स्नान, विश्राम और घरेलू हीटिंग जैसी जरूरतों के लिए भी किया जाता है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड में भी इन स्रोतों से पर्यटन की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों के आसपास जियोथर्मल स्पा और बलेनोथेरेपी जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इसके अलावा, पानी और उससे मिलने वाली गर्मी का इस्तेमाल जलीय कृषि, खेती तथा ग्रीनहाउस में फसलों के उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। इन गतिविधियों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर इस्तेमाल संभव है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर कुमार तिवारी के अनुसार, उन्होंने उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स को लेकर अध्ययन किया है। इस अध्ययन में उत्तराखंड में 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स की पहचान की गई। उन्होंने बताया कि राज्य में अन्य प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत भी मौजूद हैं, लेकिन अभी तक सभी की पहचान नहीं हो पाई है। डॉ. तिवारी के मुताबिक, कुमाऊं क्षेत्र में गोरी गंगा के आसपास मौजूद जियोथर्मल बेल्ट विशेष महत्व रखती है। करीब 13 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस इलाके में कई गर्म पानी के स्रोत मौजूद हैं। इनकी मदद से जियोथर्मल स्पा, बलेनोथेरेपी, एक्वाकल्चर, कृषि और ग्रीनहाउस कल्टीवेशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं।

लंबे समय तक उपलब्ध रहने वाला प्राकृतिक संसाधन
वैज्ञानिकों के अनुसार, जियोथर्मल स्प्रिंग्स प्रकृति से मिलने वाला ऐसा संसाधन हैं, जिनका योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इन स्रोतों से लगातार निकलने वाला गर्म पानी पर्यटन और दूसरी आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोगी हो सकता है। इसलिए इनके इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने की जरूरत है। डॉ. समीर कुमार तिवारी ने जियोथर्मल स्प्रिंग्स को प्राकृतिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए कहा कि इनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सकता है। ऐसे में इन संसाधनों को केवल प्राकृतिक आकर्षण के रूप में देखने के बजाय इनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बलेनोथेरेपी का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें गर्म या खनिजयुक्त पानी का इस्तेमाल स्नान और विश्राम संबंधी प्रक्रियाओं में किया जाता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सुविधाएं पर्यटन का हिस्सा बन चुकी हैं। उत्तराखंड में भी वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षा मानकों के आधार पर इस तरह की सुविधाओं को विकसित करने की संभावनाएं हैं। हालांकि, प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों के पानी में मौजूद खनिजों की मात्रा और रासायनिक संरचना अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी स्रोत को स्नान या अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच आवश्यक है।

तप्त कुंड का उदाहरण देकर पर्यटन मंत्री ने बताई उपयोगिता
उत्तराखंड में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों को पर्यटन से जोड़ने की योजना को लेकर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी इनकी उपयोगिता पर जोर दिया है। उन्होंने बदरीनाथ धाम के पास स्थित तप्त कुंड का उदाहरण देते हुए कहा कि पैदल यात्रा कर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु अक्सर थक जाते हैं। ऐसे में तप्त कुंड में स्नान करने से उन्हें राहत महसूस होती है। पर्यटन मंत्री के अनुसार, पहाड़ों में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स का इस्तेमाल पर्यटन की दृष्टि से काफी उपयोगी हो सकता है। इन प्राकृतिक स्रोतों को सुविधाजनक पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करके अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों के आसपास स्नान और विश्राम के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तराखंड में भी इसी तरह की पहल को अपनाकर पर्यटन के नए विकल्प तैयार किए जा सकते हैं। इससे प्रदेश के उन क्षेत्रों को भी पर्यटन से जोड़ने में मदद मिल सकती है, जहां प्राकृतिक संसाधन तो मौजूद हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास अभी सीमित है।

पर्यटन सचिव बोले, मदकोट को सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि राज्य में नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने और पर्यटकों को अलग तरह के अनुभव उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में पिथौरागढ़ जिले के मदकोट में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत यहां कॉटेज और ठहरने की सुविधाओं के साथ हॉट स्प्रिंग के पानी से स्नान की व्यवस्था विकसित की जाएगी। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थान बनाए जाने की योजना है। पर्यटन सचिव का कहना हैं कि परियोजना शुरू करने से पहले पानी की जांच और सुरक्षा से संबंधित सभी जरूरी पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी, ताकि गर्म पानी के स्रोत की प्रकृति और उसके इस्तेमाल से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझा जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं का फायदा केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से होटल, होमस्टे, खानपान, स्थानीय परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल सकता है। इससे स्थानीय युवाओं और परिवारों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।

दूसरे गर्म पानी के स्रोतों को भी पर्यटन से जोड़ने की तैयारी
उत्तराखंड में जियोथर्मल स्प्रिंग्स की मौजूदगी को देखते हुए सरकार की योजना इनका पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग करने की है। इसके लिए ऐसे स्थानों की पहचान करना जरूरी होगा, जहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं और प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल संभव है।मदकोट में प्रस्तावित जियोथर्मल पूल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। यहां पर्यटकों के लिए स्नान और ठहरने की सुविधाएं विकसित होने से क्षेत्र को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में पहचान मिलने की संभावना है। इसके बाद दूसरे उपयुक्त स्थानों पर भी इसी तरह की परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस तरह की योजनाओं की सफलता के लिए केवल पर्यटक सुविधाएं विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा। पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा और प्राकृतिक स्रोतों की निरंतरता जैसे पहलुओं का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने से पर्यटन गतिविधियों का लाभ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। फिलहाल मदकोट में योजना को आगे बढ़ाने से पहले वैज्ञानिक जांच और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर काम किया जाना है। इसके बाद परियोजना के विकास और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि यह पहल सफल रहती है, तो उत्तराखंड के प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड आने वाले समय में पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का नया माध्यम बन सकते हैं।