आशा कार्यकर्ताओं के लिए खुशखबरी, मानदेय और प्रोत्साहन राशि जारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटर्स के लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए कुल 37 करोड़ 76 लाख 51 हजार 736 रुपये की राशि जारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह धनराशि प्रदेश के सभी विकासखंडों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटर्स के लिए निर्धारित मानदेय और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के लिए है। जिलों को यह बजट 10 सितंबर 2026 को विकासखंडवार उनके खातों में जारी कर दिया गया है।
आशा कार्यकर्ताओं को हर महीने 3300 रुपये
निर्धारित मानदेय के तौर पर आशा कार्यकर्ताओं को 3,300 रुपये प्रतिमाह, जबकि आशा फैसिलिटेटर्स को 2,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। इसके अलावा अलग-अलग राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जिम्मेदारी निभाने और गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा करने पर आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलती है। इसमें राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (टीबी), नियमित टीकाकरण, RBSK, RKSK, मातृ स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव और शिशु एवं बाल स्वास्थ्य समेत कई कार्यक्रम शामिल हैं।
36.64 करोड़ आशा कार्यकर्ताओं के लिए
जारी कुल राशि में सबसे बड़ा हिस्सा आशा कार्यकर्ताओं के लिए निर्धारित किया गया है। उन्हें 36 करोड़ 64 लाख 52 हजार 856 रुपये दिए जाएंगे। वहीं आशा फैसिलिटेटर्स के लिए 1 करोड़ 11 लाख 98 हजार 880 रुपये की राशि तय की गई है। विभाग का कहना है कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करती हैं। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं की जानकारी पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं का योगदान प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है। सरकार ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने के साथ आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटर्स के हितों को लेकर भी प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि मानदेय के साथ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आशा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करने में भी मदद मिलेगी।

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