September 10, 2026

उत्तराखंड में इंटर्न-पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर मंथन तेज, शासन ने दिया भरोसा..

उत्तराखंड में इंटर्न-पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर मंथन तेज, शासन ने दिया भरोसा..

 

 

उत्तराखंड: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डॉक्टरों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। स्टाइपेंड समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे चिकित्सकों से चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने मुलाकात कर उनकी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान शासन स्तर पर मांगों को लेकर चल रही प्रक्रिया की जानकारी देते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई गई। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने आंदोलनरत चिकित्सकों से बातचीत के दौरान कहा कि स्टाइपेंड के मामले में सरकार गंभीरता से काम कर रही है। प्रयास किया जा रहा है कि उत्तराखंड में इंटर्न और पीजी डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों के बराबर या उससे बेहतर किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन स्तर पर लगातार मंथन चल रहा है और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने का प्रयास

डॉ. सयाना ने एमबीबीएस इंटर्न छात्रों से भी बातचीत की और शासन स्तर पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मांगों से संबंधित प्रक्रिया में यदि किसी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी समस्या सामने आ रही है तो उसका समाधान किया जा रहा है। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि शासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए धैर्य बनाए रखें। धरने के बीच अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक के अनुसार इंटर्न और पीजी डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं किया है। आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर की सेवाएं भी संचालित हो रही हैं। वहीं ओपीडी और आईपीडी में वरिष्ठ चिकित्सकों की ओर से मरीजों को नियमित सेवाएं दी जा रही हैं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा आंदोलन में केवल एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डॉक्टर शामिल हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने की बात सही नहीं है।

सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

शासन की ओर से आंदोलनरत चिकित्सकों को भरोसा दिलाया गया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। स्टाइपेंड सहित अन्य मुद्दों पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द सकारात्मक निर्णय सामने आने की उम्मीद है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सरकार की ओर से निर्णय आने के बाद आंदोलन समाप्त होगा और चिकित्सक नियमित रूप से अपनी सेवाओं में लौटेंगे।