October 14, 2026

प्राथमिक स्कूलों में समावेशी शिक्षा पर चुनौती, विशेष शिक्षकों के 200 से अधिक पद खाली..

प्राथमिक स्कूलों में समावेशी शिक्षा पर चुनौती, विशेष शिक्षकों के 200 से अधिक पद खाली..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश में विशेष शिक्षकों के स्वीकृत पदों में बड़ी संख्या अब भी रिक्त है। इससे दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप शिक्षा, मार्गदर्शन और व्यक्तिगत सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रिक्त पदों पर भर्ती की मांग तेज हो रही है। शासन ने 27 सितंबर 2022 को प्राथमिक विद्यालयों के लिए विशेष शिक्षकों के 380 पद सृजित किए थे। बाद में 28 मई 2025 को जारी संशोधित शासनादेश के तहत इन पदों की संख्या घटाकर 285 कर दी गई। इसके बावजूद मौजूदा स्थिति यह है कि स्वीकृत पदों में से 200 से अधिक पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।

कई जिलों में बेहद कम शिक्षक तैनात
उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के कई जिलों में विशेष शिक्षकों की कमी गंभीर बनी हुई है। हरिद्वार में स्वीकृत 18 पदों में से केवल दो पर शिक्षक तैनात हैं, जबकि 16 पद रिक्त हैं। नैनीताल में तीन पद भरे गए हैं और 21 पद खाली हैं। इसी तरह उत्तरकाशी में आठ विशेष शिक्षक कार्यरत हैं और 10 पद रिक्त हैं। पौड़ी गढ़वाल में आठ पदों पर नियुक्तियां हुई हैं, जबकि 38 पद खाली पड़े हैं। चमोली में छह विशेष शिक्षक तैनात हैं और 21 पदों पर भर्ती होना बाकी है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जनपदों में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की उपलब्धता काफी कम है। अन्य जिलों में भी रिक्तियों की स्थिति समावेशी शिक्षा के संचालन के लिए चुनौती बनी हुई है।

विशेष जरूरतों वाले बच्चों की पढ़ाई पर असर
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान कई तरह के सहयोग की जरूरत होती है। उनकी सीखने की क्षमता और आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाने, व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने और पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में विशेष शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए केवल पदों का सृजन पर्याप्त नहीं है। विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती भी जरूरी है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को अपेक्षित शैक्षणिक सहयोग मिलने में कठिनाई हो सकती है।

शासनादेश के बाद शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का मामला अब भर्ती प्रक्रिया शुरू होने पर टिका है। इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता किए जाने की बात कही गई है। बताया गया है कि शासनादेश जारी होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अब देखना होगा कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन कब तक निर्णय लेता है। भर्ती में देरी जारी रहने पर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की व्यवस्था को मजबूत करना चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है।