October 5, 2026

सामान्य जामुन से अलग है ‘थाई अर्ली किंग’, 60 ग्राम तक वजन और साल में दो बार फल..

सामान्य जामुन से अलग है ‘थाई अर्ली किंग’, 60 ग्राम तक वजन और साल में दो बार फल..

 

 

 

 

उत्तराखंड: आमतौर पर जामुन का मौसम साल में एक ही बार आता है और इसका फल भी अपेक्षाकृत छोटा होता है। लेकिन पंतनगर किसान मेले में प्रदर्शित जामुन की एक खास किस्म किसानों और बागवानी में रुचि रखने वालों का ध्यान खींच रही है। ‘थाई अर्ली किंग’ नाम की इस प्रजाति की खासियत बताई जा रही है कि इससे साल में दो बार फल लिया जा सकता है। मेले में कोलकाता की शबनम नर्सरी के स्टॉल पर इस जामुन के पौधे उपलब्ध हैं। नर्सरी के मुताबिक इस प्रजाति के एक फल का वजन करीब 55 से 60 ग्राम तक पहुंच सकता है। वहीं, पौधा लगाने के लगभग डेढ़ से दो साल के भीतर फल देना शुरू कर सकता है।

साल में दो सीजन में फल
‘थाई अर्ली किंग’ की फल देने की अवधि भी इसे सामान्य जामुन की किस्मों से अलग बनाती है। नर्सरी के अनुसार इस पौधे पर मार्च-अप्रैल और नवंबर-दिसंबर के दौरान फल आते हैं। यानी अनुकूल परिस्थितियों में किसान एक ही पौधे से वर्ष में दो बार उत्पादन ले सकते हैं। तुलना करें तो सामान्य जामुन के पौधों को फल देने में करीब पांच साल तक का समय लग सकता है और इनके फलों का वजन आमतौर पर 20 से 25 ग्राम के आसपास बताया जाता है।

छोटे बीज और मजबूत डंठल का दावा
नर्सरी संचालकों के अनुसार इस किस्म के जामुन में बीज अपेक्षाकृत छोटा होता है। फल का डंठल से जुड़ाव मजबूत होने के कारण तेज हवा में फल के जल्दी गिरने की संभावना भी कम बताई गई है। इसके अलावा इसकी सेल्फ लाइफ बेहतर होने का दावा किया जा रहा है, जिससे फल को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा हो सकती है। नर्सरी की ओर से बताया गया कि उत्तराखंड के तराई क्षेत्र की मिट्टी और मौसम इस किस्म की खेती के लिए अनुकूल हो सकते हैं। किसान मेले में इच्छुक किसानों को इसके पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आयुर्वेद में भी जामुन को उपयोगी माना जाता है
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रियरंजन तिवारी (एमडी आयुर्वेद) के अनुसार जामुन को नियमित आहार में शामिल किया जा सकता है और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। उनके मुताबिक जामुन का पारंपरिक रूप से पाचन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि, किसी बीमारी के इलाज या ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए जामुन को दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। किसान मेले में इस नई किस्म को लेकर किसानों की दिलचस्पी बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोग इसके पौधे और खेती की संभावनाओं के बारे में जानकारी ले रहे हैं।