दून फिल्म स्कूल बना ग्लोबल फिल्म एजुकेशन का केंद्र, भारत-ब्राज़ील के छात्र साथ करेंगे फिल्म निर्माण..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार को फिल्म शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। दून फिल्म स्कूल, दून सोसायटी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन और ब्राज़ील की प्रतिष्ठित संस्था Cinema No Interior के संयुक्त तत्वावधान में “भारत–ब्राज़ील फिल्म एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 2026” का शुभारंभ दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित भव्य ओरिएंटेशन एवं उद्घाटन समारोह के साथ किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, फिल्म विशेषज्ञों, कलाकारों, सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। दून फिल्म स्कूल के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ प्रियदर्शी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल केवल दो देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सिनेमा के माध्यम से भारत और ब्राज़ील की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मक सोच और सामाजिक मूल्यों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सिनेमा वैश्विक संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है और ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी फिल्मकार के लिए तकनीकी दक्षता जितनी आवश्यक है, उतनी ही महत्वपूर्ण विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता भी है। उनका मानना है कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल फिल्म निर्माण की बारीकियां ही नहीं सिखाएगा, बल्कि उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और रचनात्मक नेतृत्व के लिए भी तैयार करेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के. एस. चौहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद (UFDC), ने कहा कि उत्तराखण्ड तेजी से फिल्म निर्माण और फिल्म शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, बेहतर फिल्म नीति और विकसित हो रहे फिल्म संस्थानों ने इसे देश के प्रमुख फिल्म गंतव्यों में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राज़ील के बीच शुरू हुआ यह सहयोग विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा और इससे उत्तराखण्ड की फिल्म इंडस्ट्री को भी नई दिशा मिलेगी।
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. हेमंत बिष्ट, उप परीक्षा नियंत्रक, श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, ने कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल युवा फिल्मकारों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करेगी। कार्यक्रम में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सलाहकार डॉ. एम. के. ओटानी, नज़रबट्टू प्रोडक्शंस के अमीन खान, Coloured Checkers के वैभव गोयल तथा ब्राज़ील से आए Cinema No Interior के प्रतिनिधि एंटोनियो मार्कोस गोम्स डी कार्वाल्हो और मारिया लॉरा विएरा कैवलकांती वियाना ने भी अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ब्राज़ील की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराएं और फिल्म निर्माण की शैली एक-दूसरे से सीखने के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने भविष्य में संयुक्त फिल्म निर्माण, शोध, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
दून फिल्म स्कूल के डीन एस. आर. मुकेश ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक व्यवस्था, विभागों और संकाय सदस्यों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में सैद्धांतिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि विद्यार्थी उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से रचनात्मक सोच, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। ओरिएंटेशन सत्र के दौरान भारत–ब्राज़ील फिल्म एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसमें आगामी महीनों में आयोजित होने वाली कार्यशालाओं, मास्टरक्लास, संयुक्त फिल्म निर्माण परियोजनाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, शैक्षणिक सहयोग और छात्र विनिमय गतिविधियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान भारतीय और ब्राज़ीली विद्यार्थियों ने एक-दूसरे से परिचय किया तथा अपने-अपने देश की संस्कृति, फिल्म परंपराओं और सीखने के अनुभव साझा किए। इस संवाद ने दोनों देशों के विद्यार्थियों के बीच आपसी समझ और सहयोग की मजबूत नींव रखी।
समारोह में दून सोसायटी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के अध्यक्ष जय सिंह सहित संस्था के कई पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे। उन्होंने इस पहल को उत्तराखण्ड के फिल्म शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का माध्यम बनेंगे। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में इस तरह के सहयोग से उत्तराखण्ड में फिल्म शिक्षा और फिल्म निर्माण को नई पहचान मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और विचारों को जोड़ने वाली एक प्रभावशाली शक्ति है। भारत–ब्राज़ील फिल्म एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 2026 इसी सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर सीखने, नई तकनीकों को अपनाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकसित करने और रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए अवसर उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग लगातार जारी रहे, तो उत्तराखण्ड न केवल फिल्म शूटिंग के लिए बल्कि फिल्म शिक्षा और रचनात्मक प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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