श्रीनगर बेस अस्पताल में शुरू हुई डिजिटल अल्ट्रासाउंड सुविधा..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय बेस चिकित्सालय, श्रीनगर में अत्याधुनिक डिजिटल अल्ट्रासाउंड (यूएसजी) सेवा की शुरुआत कर दी गई है। नई तकनीक से लैस इस सुविधा के शुरू होने से अब गढ़वाल मंडल के दूरस्थ इलाकों के मरीजों को बेहतर और सटीक जांच के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सोमवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने डिजिटल अल्ट्रासाउंड मशीन का शुभारंभ किया। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनीता आर्या की नियुक्ति के बाद अब नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस नई व्यवस्था से मरीजों को समय पर जांच के साथ विशेषज्ञ परामर्श भी एक ही स्थान पर मिल सकेगा।
पहले से अधिक सटीक और तेज होगी जांच
अस्पताल में स्थापित नई डिजिटल अल्ट्रासाउंड मशीन आधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे जांच की गुणवत्ता पहले की तुलना में अधिक बेहतर होगी। हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग के कारण बीमारी की पहचान अधिक स्पष्ट और सटीक तरीके से की जा सकेगी। साथ ही जांच प्रक्रिया भी पहले की अपेक्षा कम समय में पूरी होगी, जिससे मरीजों की लंबी प्रतीक्षा भी कम होगी। नई सुविधा का सबसे अधिक लाभ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मिलेगा। इस मशीन के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास की निगरानी के साथ ही लीवर, किडनी, पित्ताशय, अग्न्याशय, मूत्राशय, प्रोस्टेट, थायराइड, गर्भाशय और अंडाशय सहित कई महत्वपूर्ण अंगों की जांच की जा सकेगी। इसके अलावा शरीर में गांठ, सूजन, पथरी, आंतरिक रक्तस्राव और अन्य कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकेगा, जिससे इलाज शुरू करने में देरी नहीं होगी।
मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे
अब तक पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले अनेक मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए ऋषिकेश, देहरादून या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता था। इससे उन्हें अतिरिक्त समय और आर्थिक खर्च उठाना पड़ता था। नई सुविधा शुरू होने के बाद अब अधिकांश मरीजों को यह जांच श्रीनगर में ही उपलब्ध हो जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनेंगी। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनीता आर्या ने कहा कि अल्ट्रासाउंड जांच उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों के माध्यम से की जाती है। इसमें किसी प्रकार का रेडिएशन नहीं होता, इसलिए यह गर्भवती महिलाओं सहित सभी मरीजों के लिए सुरक्षित जांच पद्धति मानी जाती है। आधुनिक डिजिटल तकनीक के कारण रिपोर्ट की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर होगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना हैं कि अस्पताल में 3 अगस्त से डिजिटल अल्ट्रासाउंड मशीन का नियमित संचालन शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। भविष्य में भी अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जा सकें।

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