June 19, 2026

22 हजार उपनल कर्मियों पर असर, धामी कैबिनेट ने वेतन समानता पर लिया बड़ा निर्णय..

22 हजार उपनल कर्मियों पर असर, धामी कैबिनेट ने वेतन समानता पर लिया बड़ा निर्णय..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन के दायरे का विस्तार कर दिया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके बाद अब 15 अक्टूबर 2024 तक कार्यरत सभी पात्र उपनल कर्मचारियों को इस व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस फैसले को लंबे समय से वेतन विसंगति का सामना कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब तक समान कार्य-समान वेतन का लाभ केवल उन उपनल कर्मचारियों को मिल रहा था जो 12 नवंबर 2018 तक सेवाओं में कार्यरत थे। इस कट-ऑफ तिथि के कारण बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी इस लाभ से वंचित रह गए थे, जो बाद में नियुक्त हुए लेकिन समान जिम्मेदारियों और कार्यभार का निर्वहन कर रहे थे। कैबिनेट ने न्यायालयों के निर्देशों और बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कट-ऑफ तिथि में संशोधन कर इसे 15 अक्टूबर 2024 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।

सरकार का यह कदम उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप माना जा रहा है। विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 15 अक्टूबर 2024 को दिए गए आदेश के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जिससे समान कार्य कर रहे कर्मचारियों के बीच वेतन संबंधी असमानता को कम करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से करीब 11 हजार कर्मचारी पहले से समान कार्य-समान वेतन का लाभ प्राप्त कर रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में कर्मचारी इस व्यवस्था से बाहर थे। नए निर्णय के बाद शेष कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को संशोधित वेतन का लाभ निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए जाएंगे ताकि लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से इसका फायदा मिल सके। कर्मचारियों का मानना है कि इस फैसले से लंबे समय से चली आ रही वेतन असमानता दूर होगी और उन्हें भी अपने समकक्ष कर्मचारियों के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सकेगी। उपनल कर्मचारियों के विभिन्न संगठन कई वर्षों से समान कार्य-समान वेतन की मांग उठा रहे थे। उनका कहना था कि समान कार्य करने के बावजूद वेतन में अंतर कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करता है। समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन, ज्ञापन और न्यायालयों का दरवाजा भी खटखटाया गया। ऐसे में सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है।

उपनल कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे न केवल आर्थिक राहत मिलेगी बल्कि कर्मचारियों को सम्मान और आत्मविश्वास भी प्राप्त होगा। संगठन ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। राजनीतिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में अगले विधानसभा चुनावों से पहले कर्मचारियों के हित में लिया गया यह निर्णय बड़े कर्मचारी वर्ग तक सकारात्मक संदेश पहुंचा सकता है। प्रदेश में हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उपनल व्यवस्था से जुड़े हुए हैं, ऐसे में इस फैसले का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समान कार्य-समान वेतन की व्यवस्था केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर समानता और न्याय की भावना को भी मजबूत करती है। उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और श्रम न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारी संतुष्टि दोनों स्तरों पर दिखाई दे सकते हैं।