July 23, 2026

उत्तराखंड में बढ़ेगा सेब उत्पादन, 500 हेक्टेयर में नए बाग लगाने के लिए 17 करोड़ से अधिक जारी..

उत्तराखंड में बढ़ेगा सेब उत्पादन, 500 हेक्टेयर में नए बाग लगाने के लिए 17 करोड़ से अधिक जारी..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में सेब उत्पादन बढ़ाने और पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एप्पल मिशन को गति दे दी है। मिशन के तहत वर्ष 2026-27 में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 500 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिसघन (हाई डेंसिटी) सेब के नए बाग विकसित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए स्वीकृत बजट में से 17 करोड़ 52 लाख रुपये की पहली किश्त संबंधित जिलों को जारी कर दी गई है, जबकि पूरी योजना के लिए 34 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और उन्नत किस्मों के माध्यम से राज्य में सेब उत्पादन बढ़ाना है, ताकि सीमित भूमि पर भी किसानों को अधिक उपज और बेहतर आमदनी मिल सके। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को रोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक एप्पल मिशन के तहत पांच हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में नए सेब के बाग विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले चरण में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 500 हेक्टेयर क्षेत्र को हाई डेंसिटी सेब बागवानी के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सेब उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों की आय भी कई गुना बढ़ सकती है। वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है। इन बागों से हर वर्ष करीब 44 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक बागवानी की तुलना में हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक अपनाने से कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पारंपरिक बागों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक आधारित सेब बागवानी को भी बढ़ावा दे रही है।

किसानों को मिलेगा 80 प्रतिशत अनुदान

एप्पल मिशन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत किसानों को पौधरोपण और बाग विकसित करने के लिए 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक बागवानी तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। सरकार का उद्देश्य आर्थिक सहायता के माध्यम से किसानों का शुरुआती निवेश कम करना है, ताकि वे बिना अधिक वित्तीय बोझ के उन्नत किस्मों के सेब के बाग तैयार कर सकें। योजना के तहत पारंपरिक किस्मों के बजाय उच्च गुणवत्ता और अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत सेब प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इनमें किंग रोट, मेमा मास्टर, जेड वेन और हैपेक जैसी किस्में शामिल हैं। इन प्रजातियों की खासियत यह है कि ये कम समय में फल देना शुरू कर देती हैं और प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी अधिक होता है। साथ ही इनका बाजार मूल्य भी अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।

उद्यान विभाग के अनुसार हाई डेंसिटी एप्पल प्लांटेशन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें लगाए गए पौधों से तीन से चार वर्षों के भीतर व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू हो जाता है। पारंपरिक सेब बागों की तुलना में यह अवधि काफी कम है, जिससे किसानों को जल्दी आय मिलने लगती है और निवेश की भरपाई भी कम समय में संभव हो जाती है। एप्पल मिशन के तहत बागों का विकास क्लस्टर मॉडल पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सेब उत्पादन सुनिश्चित करना है। जब किसी क्षेत्र में एक साथ अधिक उत्पादन होगा तो वहां ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और मार्केटिंग जैसी सुविधाएं विकसित करना आसान होगा। इससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में बागवानी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। हाई डेंसिटी सेब बागवानी से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके अलावा फल प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं विकसित होंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन

राज्य सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक बागवानी तकनीकों को जोड़कर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाए। एप्पल मिशन के तहत पौधरोपण, तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और विपणन व्यवस्था को एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है। यदि योजना तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है, वहीं पर्वतीय किसानों को भी आधुनिक बागवानी के माध्यम से बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।