July 14, 2026

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, पर्वतारोहण नीति के जरिए बढ़ेगा साहसिक पर्यटन..

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, पर्वतारोहण नीति के जरिए बढ़ेगा साहसिक पर्यटन..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार राज्य में साहसिक पर्यटन और ईको टूरिज्म को नई दिशा देने की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में पहली बार व्यापक पर्वतारोहण नीति (Mountaineering Policy) तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य ट्रैकिंग, पर्वतारोहण और प्रकृति आधारित पर्यटन को व्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। सरकार अगले माह तक इस नीति का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ राज्य में ईको टूरिज्म और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं की समीक्षा की। बैठक में ट्रैकिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने, नई पर्वत चोटियों को पर्यटन के लिए विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन विस्तार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की नई ट्रैकिंग नीति को अगस्त तक कैबिनेट में प्रस्तुत करने की तैयारी पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिन 83 पर्वत चोटियों पर ट्रैकिंग की अनुमति है, उनके अलावा अन्य उपयुक्त चोटियों का भी सर्वे कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से खोला जाए। इसके लिए आवश्यक सभी विभागीय अनुमतियों और प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन नई चोटियों को ट्रैकिंग के लिए चिन्हित किया जा रहा है, उनका पर्यावरणीय ऑडिट तेजी से पूरा कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

सरकार ने वन क्षेत्र में संचालित पर्यटन गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। अब वन विभाग के अधीन संचालित सभी ट्रैकिंग रूट, माउंटेनियरिंग गतिविधियां, पर्यटन स्थल और वन विश्राम गृहों की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी। इससे पर्यटकों को घर बैठे बुकिंग की सुविधा मिलेगी और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में ईको टूरिज्म की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इन संभावनाओं को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन का विकास इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे तथा स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकें। बैठक में जबरखेत मॉडल पर विकसित किए जा रहे नौ नए ईको टूरिज्म स्थलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करते हुए अक्टूबर माह में उनका लोकार्पण सुनिश्चित किया जाए।

राज्य में प्रकृति आधारित पर्यटन को पेशेवर स्वरूप देने के लिए नेचर गाइड प्रशिक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके तहत स्थायी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, प्रशिक्षण का मानक पाठ्यक्रम तैयार करने और केंद्र सरकार के मौजूदा कोर्स के साथ अतिरिक्त विषयों को शामिल करते हुए प्रमाणपत्र आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यह सर्टिफिकेशन कोर्स अक्टूबर तक प्रारंभ करने की तैयारी पूरी की जाए। इसके साथ ही वन विश्राम गृहों और ट्रैकिंग के लिए चिन्हित 31 स्थलों पर ईको कैंप संचालित करने की योजना भी तैयार की जाएगी। इसके संचालन की जिम्मेदारी वन विभाग अथवा वन विकास निगम में से किसी एक संस्था को सौंपने के लिए एक माह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वन विकास निगम को अधिक प्रभावी और संसाधन संपन्न बनाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव भी जल्द शासन को भेजने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि नई पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग नीति लागू होने के बाद उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत पर्यटन विकास को भी मजबूती मिलेगी।