उत्तराखंड के हर जिले में शुरू होगा विदेशी भाषा प्रशिक्षण..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्कूली विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने और युवाओं के रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल की तैयारी की जा रही है। प्रदेश के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं की शिक्षा शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी भाषा प्रशिक्षण को केवल स्कूलों तक सीमित न रखते हुए प्रदेशव्यापी कौशल विकास कार्यक्रम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इस पहल से विद्यार्थियों, तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
हर जिले में स्थापित होंगे विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र
विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर संचालित करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही कौशल विकास विभाग के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में संचालित संस्थानों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले से उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोगों तक विदेशी भाषा शिक्षा पहुंचाने में मदद मिलेगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पहल को एक व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम के तौर पर तैयार किया जाना चाहिए, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं को अपनी क्षमता और योग्यता बढ़ाने का अवसर मिल सके। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार इस तरह किया जाए कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले इच्छुक लोग भी इसका लाभ उठा सकें।
स्कूली विद्यार्थियों से लेकर चिकित्सा क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों के साथ आईटीआई में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं, चिकित्सा एवं नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं और अन्य इच्छुक व्यक्तियों को शामिल करने की योजना है। विदेशी भाषाओं का ज्ञान आज शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसरों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में प्रशिक्षण की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से युवाओं को नई भाषाएं सीखने और अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिल सकता है। विशेष रूप से चिकित्सा और नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए विदेशी भाषा का प्रशिक्षण उपयोगी साबित हो सकता है। विदेश में रोजगार की संभावनाएं तलाशने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित देश की भाषा का ज्ञान हासिल करने में सहायता मिल सकती है। इसी प्रकार आईटीआई और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए भी यह प्रशिक्षण भविष्य में रोजगार के नए विकल्पों की तैयारी का माध्यम बन सकता है। हालांकि, इस कार्यक्रम के तहत किन-किन विदेशी भाषाओं को पढ़ाया जाएगा, प्रशिक्षण की अवधि क्या होगी और प्रवेश की प्रक्रिया किस प्रकार निर्धारित की जाएगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर से आगे बढ़ेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
प्रदेश में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को लेकर कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की ओर से पहले से ही पहल की जा रही है। वर्तमान में देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार कर इन्हें राज्य के अन्य जिलों तक पहुंचाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विदेशी भाषा सीखने की सुविधा को कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेशभर में उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के साथ ही मौजूदा संस्थागत संसाधनों को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इससे प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित करने के बजाय विभागीय संस्थानों की सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।
दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की ली जाएंगी सेवाएं
विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया गया है। विश्वविद्यालय में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण गतिविधियों से जोड़कर उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है। इससे एक ओर प्रशिक्षण केंद्रों को सहयोग मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपने भाषा ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का उपयोग करने का अवसर प्राप्त होगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योगदान देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके लिए उन्हें शैक्षणिक क्रेडिट या अन्य उपयुक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई। इस तरह की व्यवस्था से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतरता प्रदान करने में मदद मिल सकती है।
कौशल विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
विदेशी भाषा प्रशिक्षण को कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ने का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। भाषा संबंधी दक्षता कई क्षेत्रों में अतिरिक्त योग्यता के रूप में काम आ सकती है। यदि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाता है, तो इससे विद्यार्थियों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अपनी व्यावसायिक क्षमताएं बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई की संभावनाओं पर विचार करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, स्कूलों में पढ़ाई शुरू करने का अंतिम निर्णय, विषयों का चयन, शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक सत्र से संबंधित विवरण अलग से तय किए जाने होंगे।
सचिवालय में हुई बैठक में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को प्रदेशभर में विस्तार देने मौजूदा प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत बनाने और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इस पहल से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पांडेय, ज्योति यादव और दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश में इस पहल के आगे बढ़ने से विदेशी भाषा सीखने की सुविधा अधिक लोगों तक पहुंच सकती है। अब कार्यक्रम के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और स्कूलों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई को लेकर सामने आने वाले विस्तृत निर्णयों पर नजर रहेगी।

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