October 13, 2026

उत्तराखंड में महंगाई का ग्राफ चढ़ा, ग्रामीण इलाकों में शहरों से ज्यादा असर

उत्तराखंड में महंगाई का ग्राफ चढ़ा, ग्रामीण इलाकों में शहरों से ज्यादा असर..

 

 

 

उत्तराखंड: त्योहारों के बीच बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, कीमतों में बढ़ोतरी का असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के सितंबर 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई है। वहीं उत्तराखंड में यह दर 5.47 प्रतिशत दर्ज की गई। अगस्त की तुलना में प्रदेश में महंगाई दर में 0.82 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। उत्तराखंड में महंगाई का असर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग नजर आ रहा है। सितंबर के आंकड़ों में ग्रामीण इलाकों की महंगाई दर शहरी क्षेत्रों से अधिक रही। ऐसे में त्योहारों के दौरान खरीदारी, रसोई के खर्च और घरेलू जरूरतों का हिसाब-किताब संभालना परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

देश में भी बढ़ी महंगाई, खाद्य मुद्रास्फीति 7.74% पर
राष्ट्रीय स्तर पर अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। इस दौरान खाद्य मुद्रास्फीति में भी तेजी दर्ज की गई। अगस्त में खाद्य महंगाई 5.97 प्रतिशत थी, जबकि सितंबर में यह बढ़कर 7.74 प्रतिशत पहुंच गई। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। सब्जियों और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों के महंगे होने से परिवारों को अपनी मासिक जरूरतों के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। प्रदेश में अगस्त और सितंबर के आंकड़ों की तुलना करने पर महंगाई दर में बढ़ोतरी सामने आई है। अगस्त 2026 में उत्तराखंड की संयुक्त खुदरा महंगाई दर 4.65 प्रतिशत बताई गई थी, जो सितंबर में बढ़कर 5.47 प्रतिशत हो गई। सितंबर के आधिकारिक आंकड़ों में ग्रामीण क्षेत्रों की महंगाई दर 5.95 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों की दर 4.63 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई का दबाव शहरी क्षेत्रों के मुकाबले अधिक है। पहाड़ी जिलों में दूर-दराज की बस्तियों तक सामान पहुंचाने की चुनौतियां और परिवहन की लागत स्थानीय बाजारों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, महंगाई के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक महंगाई की वजह केवल परिवहन खर्च है।

महंगे प्याज ने बढ़ाई रसोई की चिंता
सितंबर के राष्ट्रीय आंकड़ों में प्याज की महंगाई दर सबसे अधिक उछाल वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्याज की सालाना महंगाई दर अगस्त में 48.78 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। इसका अर्थ है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इस्तेमाल होने वाले आंकड़ों के अनुसार प्याज की कीमतें पिछले साल के इसी महीने की तुलना में काफी अधिक थीं।

लहसुन की महंगाई दर सितंबर में 54.62 प्रतिशत, अदरक की 62.85 प्रतिशत और नींबू की 36.41 प्रतिशत दर्ज की गई। चांदी के आभूषणों की महंगाई दर भी 87.80 प्रतिशत रही। दूसरी ओर, टमाटर की दर माइनस 8.62 प्रतिशत और आलू की माइनस 11.50 प्रतिशत दर्ज की गई, यानी इन वस्तुओं के सूचकांक में पिछले साल के मुकाबले गिरावट रही। यहां यह समझना जरूरी है कि महंगाई दर में बढ़ोतरी का मतलब हर महीने कीमतों में उतनी ही बढ़ोतरी होना नहीं है। ये आंकड़े मुख्य रूप से पिछले साल के समान महीने की तुलना में कीमतों में बदलाव दर्शाते हैं।

उत्तराखंड में ग्रामीण परिवारों पर ज्यादा दबाव
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां घरेलू खर्चों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बाजारों की दूरी, सीमित परिवहन विकल्प और दुर्गम रास्तों के कारण सामान की उपलब्धता कई जगह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी परिवारों के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सितंबर की महंगाई दर 5.95 प्रतिशत रहने के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में यह 4.63 प्रतिशत रही। यह अंतर बताता है कि दोनों क्षेत्रों में महंगाई का दबाव समान नहीं है। हालांकि, वास्तविक घरेलू खर्च पर असर परिवार की आय, खपत और स्थानीय बाजार में वस्तुओं की कीमतों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

त्योहारों के मौसम में बढ़ सकती है बजट की चुनौती
त्योहारों के दौरान कपड़े, मिठाइयां, पूजा सामग्री, खाद्य पदार्थ और अन्य घरेलू जरूरतों पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे समय में खाद्य महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना परिवारों की खरीदारी की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। खासकर सीमित आय वाले परिवारों के लिए जरूरी खर्चों और त्योहारों की खरीदारी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है। उत्तराखंड में सितंबर की खुदरा महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से थोड़ी कम जरूर रही, लेकिन प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज ऊंची दर चिंता का विषय है। आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों और महंगाई के रुझान पर नजर रहेगी। सितंबर 2026 के CPI आंकड़ों के अनुसार, देश और उत्तराखंड दोनों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के मुकाबले बढ़ी है। राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी और प्याज जैसी जरूरी वस्तुओं की ऊंची महंगाई दर ने घरेलू खर्चों को लेकर चिंता बढ़ाई है। उत्तराखंड में ग्रामीण महंगाई दर का शहरी दर से अधिक होना प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में महंगाई के असमान प्रभाव को सामने लाता है। इन आंकड़ों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि महंगाई पर नजर रखना और परिवारों के बजट पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है। हालांकि, आने वाले समय में कीमतों की दिशा खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता, बाजार की परिस्थितियों और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी।