August 21, 2026

पहाड़ की संस्कृति से कमाई का हुनर, बद्री-केदार के स्मृति चिह्न बना रहीं महिलाएं..

पहाड़ की संस्कृति से कमाई का हुनर, बद्री-केदार के स्मृति चिह्न बना रहीं महिलाएं..

 

 

 

उत्तराखंड: पहाड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान अब ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का जरिया बन रही है। अगस्त्यमुनि विकासखंड में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बदरी-केदार क्षेत्र के प्रसिद्ध मंदिरों और स्थानीय वास्तुकला को स्मृति चिह्नों का रूप देकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। उनके बनाए उत्पाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच पसंद किए जा रहे हैं। अगस्त्यमुनि के ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केदारनाथ, बद्रीनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ समेत कई धार्मिक स्थलों के मंदिरों के छोटे मॉडल तैयार करती हैं। इन मॉडलों में पहाड़ी स्थापत्य की झलक दिखाई देती है। धूपबत्ती और अगरबत्ती जैसे अन्य उत्पाद भी समूह द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। समूह की सदस्य दिव्या बताती हैं कि पढ़ाई के साथ वह स्वयं सहायता समूह की गतिविधियों में भी भाग ले रही हैं। उनके मुताबिक, समूह से जुड़ने के बाद घर के आसपास ही काम करने का अवसर मिला है। इससे उन्हें आय प्राप्त करने के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने में मदद मिली है।

प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा
खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि सुरेश शाह के अनुसार, ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के तहत महिलाओं को उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह में फिलहाल छह से सात महिलाएं सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। समूह के उत्पादों की बिक्री सरस केंद्रों, स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन माध्यमों से की जा रही है। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार से आगे ग्राहक तक पहुंच बनाने का मौका मिल रहा है।

समूह के कारोबार में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में समूह ने करीब 2.54 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 3.95 लाख रुपये तक पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक समूह करीब 7 लाख रुपये के उत्पाद बेच चुका है, जबकि इस अवधि में लगभग 2.75 लाख रुपये का लाभ दर्ज किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि स्थानीय संस्कृति से जुड़े उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ रही है और महिलाएं इसे स्वरोजगार के अवसर में बदलने में सफल हो रही हैं। स्थानीय संसाधनों और बद्री-केदार की धार्मिक विरासत को बाजार की जरूरत के मुताबिक उत्पादों में ढालने से महिलाओं को आर्थिक फायदा मिल रहा है। वहीं, इन स्मृति चिह्नों के जरिए उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति और धार्मिक स्थलों की पहचान भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के माध्यम से दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच रही है। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना से जुड़ा यह प्रयास गांवों में महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार का नया रास्ता तैयार कर रहा है।