चंपावत की कोली ढेक झील ने बढ़ाई जिले की पर्यटन पहचान..
बोटिंग का लुत्फ उठाने पहुंच रहे सैलानी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित कोली ढेक झील तेजी से पर्यटकों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बनती जा रही है। लोहाघाट नगर से महज दो किलोमीटर की दूरी पर देवदार के घने जंगलों और शांत प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह कृत्रिम झील आज जिले के पर्यटन को नई पहचान दिला रही है। गर्मी के मौसम में मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं और झील की खूबसूरती के साथ बोटिंग का आनंद ले रहे हैं। अब तक उत्तराखंड में झील पर्यटन की बात आते ही सबसे पहले नैनीताल का नाम सामने आता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कोली ढेक झील ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। प्राकृतिक वादियों से घिरी यह झील देशभर से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से आने वाले सैलानी यहां पहुंचकर शांत वातावरण, ठंडी हवाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं।
बोटिंग बनी पर्यटकों की पहली पसंद
कोली ढेक झील का सबसे बड़ा आकर्षण यहां उपलब्ध बोटिंग सुविधा है। सुबह से शाम तक पर्यटकों की भीड़ झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए उमड़ती है। गर्मियों के दौरान प्रतिदिन हजारों लोग यहां पहुंच रहे हैं। झील का स्वच्छ पानी, चारों ओर फैले देवदार के जंगल और पहाड़ों की हरियाली पर्यटकों को एक यादगार अनुभव प्रदान करती है। झील में बोटिंग के साथ-साथ पर्यटक गोल्डन महाशीर समेत विभिन्न प्रजातियों की मछलियों को भी देख सकते हैं। यही वजह है कि यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों और परिवार के साथ घूमने आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।
कोली ढेक झील के निर्माण की योजना वर्ष 2006 में स्वीकृत हुई थी। इसके बाद सिंचाई विभाग ने वर्ष 2009 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजी। कई वर्षों की प्रक्रिया के बाद वर्ष 2018 में झील का निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्ष 2022 में यह परियोजना पूरी हुई। लोहावती नदी पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस कृत्रिम झील की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर, चौड़ाई लगभग 80 मीटर और गहराई करीब 21 मीटर है। निर्माण पूरा होने के बाद यह झील चंपावत जिले के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरकर सामने आई है।
सौंदर्यीकरण से बढ़ेगा पर्यटन
राज्य सरकार द्वारा कोली ढेक झील क्षेत्र को एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में तैयार करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। पहले चरण में लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से झील क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। इसके तहत आधुनिक रेस्टोरेंट, पारंपरिक शैली की पाथवे (पटाल सड़क), आकर्षक लाइटिंग, शाम के समय लाइट एंड साउंड शो तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ऐसे पहुंच सकते हैं कोली ढेक झील
दिल्ली से आने वाले पर्यटक ट्रेन या बस के माध्यम से पहले टनकपुर पहुंच सकते हैं। वहां से सड़क मार्ग द्वारा लोहाघाट आसानी से पहुंचा जा सकता है। लोहाघाट बस स्टेशन से कोली ढेक झील की दूरी लगभग दो किलोमीटर है, जिसे टैक्सी या निजी वाहन से कुछ ही मिनटों में तय किया जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक पंतनगर एयरपोर्ट तक पहुंचकर सड़क मार्ग से लोहाघाट जा सकते हैं। इसके अलावा हल्द्वानी और चंपावत से भी सड़क मार्ग के जरिए झील तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। कोली ढेक झील की यात्रा के दौरान पर्यटक लोहाघाट और चंपावत के कई प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं। इनमें एबट माउंट, मायावती स्थित अद्वैत आश्रम, बाणासुर किला, देवीधुरा मंदिर और बालेश्वर टी गार्डन प्रमुख हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र अब केवल एक झील तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित हो रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण, रोमांचक बोटिंग और लगातार विकसित हो रही आधुनिक सुविधाओं के चलते कोली ढेक झील आज उत्तराखंड के उभरते पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। आने वाले वर्षों में यह स्थल राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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