निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा का निधन, खेल प्रेमियों में शोक की लहर..
उत्तराखंड: भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाले दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। कम उम्र में ही विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले जसपाल राणा ने न केवल देश के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि खेल के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन को भारतीय खेल इतिहास की एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। जसपाल राणा उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने किशोरावस्था में ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। महज 18 वर्ष की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। उनकी प्रतिभा, अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें देश के सबसे सफल निशानेबाजों की श्रेणी में खड़ा कर दिया।
निशानेबाजी के क्षेत्र में जसपाल राणा का योगदान बेहद उल्लेखनीय रहा। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत को कई यादगार जीत दिलाईं। वर्ष 1995 के कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने आठ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। उस दौर में किसी भारतीय निशानेबाज द्वारा यह सबसे बड़ा प्रदर्शन माना गया और इसी उपलब्धि के बाद उन्हें ‘गोल्डन बॉय’ के नाम से पहचान मिली। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में वर्ष 2006 के दोहा एशियाई खेल भी शामिल हैं। प्रतियोगिता के दौरान तेज बुखार से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अदम्य साहस का परिचय देते हुए तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में आज भी एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में याद की जाती है। खास बात यह है कि एशियाई खेलों में एक ही संस्करण में तीन स्वर्ण पदक जीतने का उनका रिकॉर्ड आज भी कायम है।
जसपाल राणा ने खेल के अलावा राजनीति में भी अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतरकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की। हालांकि चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। बाद के वर्षों में उन्होंने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी की। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे प्रमुख राजनीतिक अभियानों में सक्रिय नजर आए। खेल और समाज के बीच सेतु का कार्य करने वाले जसपाल राणा को एक बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता था।
नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के मार्गदर्शक बने..
प्रतियोगी निशानेबाजी से दूरी बनाने के बाद भी जसपाल राणा खेलों से जुड़े रहे। हाल के वर्षों में उन्होंने भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनकी कोचिंग शैली और तकनीकी समझ की खेल जगत में काफी सराहना की जाती थी। युवा खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी कराई गई थी। चिकित्सकीय देखरेख में उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे बेहतर हो रहा था और वे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे थे। इसी बीच उनके निधन की खबर ने खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और उनके प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि भारतीय निशानेबाजी का यह चमकता सितारा इतनी जल्दी दुनिया को अलविदा कह देगा। जसपाल राणा का जीवन संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियों की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया और बाद में कोच के रूप में नई प्रतिभाओं को निखारने का काम किया। भारतीय निशानेबाजी के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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