स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट सिस्टम पर रोक, जून से मूल तैनाती के आधार पर मिलेगा वेतन..
उत्तराखंड: स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से विभिन्न कार्यालयों और इकाइयों में संबद्धता (अटैचमेंट) के आधार पर कार्य कर रहे अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों को अब अपने मूल तैनाती स्थल पर वापस लौटना होगा। विभाग स्तर पर इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके बाद प्रदेशभर में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की हालिया उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों में संबद्धता के आधार पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थलों पर भेजा जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए और जरूरत वाले क्षेत्रों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सकें।
निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश के सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनके अधीन कार्यरत संबद्ध अधिकारी एवं कर्मचारी बिना किसी विलंब के अपने मूल तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाए। विभाग ने सभी सक्षम प्राधिकारियों, आहरण एवं वितरण अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, चिकित्सा अधीक्षकों और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि संबद्धता समाप्त करने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। आदेशों की अवहेलना की स्थिति में जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की मानी जाएगी। विभागीय स्तर पर यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जून माह तथा इसके बाद के महीनों का वेतन केवल उसी स्थिति में जारी किया जाएगा, जब संबंधित कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थल पर उपस्थित होकर कार्य कर रहे हों। उपस्थिति और कार्यभार ग्रहण करने के आधार पर ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में संबद्धता समाप्त करने को लेकर पूर्व में भी कई बार चर्चा हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे धरातल पर लागू नहीं किया जा सका। इस बार विभाग ने कठोर रुख अपनाते हुए पूर्व में जारी सभी संबद्धता आदेशों को निरस्त करने का निर्णय लिया है। इससे विभागीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है और स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को राहत मिलेगी, जहां लंबे समय से स्टाफ की कमी महसूस की जा रही थी। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने में मदद मिल सकती है।

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