May 13, 2026

10 साल की बिजली जरूरत का बनेगा रोडमैप, उत्तराखंड में लागू होगी नई व्यवस्था..

10 साल की बिजली जरूरत का बनेगा रोडमैप, उत्तराखंड में लागू होगी नई व्यवस्था..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में भविष्य की बिजली जरूरतों को लेकर अब व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। राज्य में बढ़ती आबादी, तेजी से बदलते मौसम और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार को देखते हुए बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने “रिसोर्स एडिक्वेसी फ्रेमवर्क नियमावली-2026” का मसौदा जारी कर दिया है, जिसके जरिए आने वाले दस वर्षों में राज्य की बिजली मांग और उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में राज्य को अघोषित बिजली कटौती या आपूर्ति संकट जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके लिए पहली बार आधुनिक तकनीकों की मदद से बिजली की जरूरतों का वैज्ञानिक अनुमान तैयार किया जाएगा। आयोग ने मसौदे पर आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से 12 जून तक सुझाव मांगे हैं।

नई व्यवस्था के तहत बिजली वितरण कंपनियों, खासकर उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को पारंपरिक आकलन पद्धति छोड़कर आधुनिक तकनीकी मॉडल अपनाने होंगे। बिजली मांग का पूर्वानुमान लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें मौसम के बदलते पैटर्न, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा। बता दे कि हर साल गर्मियों और त्योहारों के मौसम में बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे कई बार आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बनता है। कई क्षेत्रों में अघोषित कटौती की स्थिति भी देखने को मिलती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए आयोग ने “प्लानिंग रिजर्व मार्जिन” (PRM) का प्रावधान प्रस्तावित किया है। इसके तहत यूपीसीएल को अनुमानित अधिकतम मांग से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करनी होगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

बिजली खरीद प्रणाली में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। मसौदे के अनुसार वितरण कंपनियों को अपनी कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से सुरक्षित करना होगा। इससे बाजार में बिजली की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर कम पड़ेगा और आपूर्ति भी स्थिर बनी रहेगी। इसके साथ ही आयोग ने ऊर्जा स्रोतों में संतुलन बनाने पर भी विशेष जोर दिया है। राज्य में पनबिजली परियोजनाओं के साथ-साथ सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, यदि यह नियमावली प्रभावी ढंग से लागू होती है तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में बिजली प्रबंधन के क्षेत्र में एक आधुनिक और तकनीक आधारित मॉडल राज्य के रूप में उभर सकता है।