उत्तराखंड के किसानों के लिए खुशखबरी, घेर-बाड़ योजना के लिए केंद्र से 25 करोड़ मंजूर..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए राज्य सरकार के प्रयास रंग लाते दिखाई दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्य में चल रही घेर-बाड़ योजना को फिर से आर्थिक सहयोग देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। इस संबंध में जानकारी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सदन में दी।
विधानसभा में चर्चा के दौरान बताया गया कि प्रदेश के कई ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों में जंगली जानवरों के कारण किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने घेर-बाड़ योजना लागू की है, जिसके तहत खेतों के चारों ओर सुरक्षा घेरा तैयार कर फसलों को वन्यजीवों से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि पहले इस योजना को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता मिलती थी, लेकिन कुछ समय बाद यह सहयोग बंद हो गया था। किसानों की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने जिला योजना के माध्यम से इस योजना को जारी रखा और इसके लिए संसाधन उपलब्ध कराए।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस विषय पर चर्चा की गई थी। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिए 25 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत कर दी है और इस संबंध में मंत्रालय का पत्र भी विभाग को प्राप्त हो चुका है। सदन में दी गई जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में जिला योजना के माध्यम से 2841 हेक्टेयर कृषि भूमि में घेर-बाड़ का कार्य कराया है। इस पहल से अब तक 44 हजार 429 किसानों को लाभ मिल चुका है। सरकार का मानना है कि इस योजना से फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान में काफी हद तक कमी आएगी और किसानों की आय को भी सुरक्षा मिलेगी।
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस योजना को आगे और विस्तार देने की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से इस वर्ष के बजट में घेर-बाड़ योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जाए, ताकि पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सके।

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