May 18, 2026

देवभूमि का दिव्य वेडिंग डेस्टिनेशन बना त्रियुगीनारायण, देशभर से पहुंच रहे नवयुगल..

देवभूमि का दिव्य वेडिंग डेस्टिनेशन बना त्रियुगीनारायण, देशभर से पहुंच रहे नवयुगल..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड की केदारघाटी में स्थित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि देशभर के नवयुगलों के लिए एक खास आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। हिमालय की शांत वादियों के बीच बसे इस दिव्य धाम में हर साल बड़ी संख्या में जोड़े विवाह के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था और भगवान विष्णु स्वयं इस दिव्य विवाह के साक्षी बने थे। यही वजह है कि नवविवाहित जोड़ों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है। समुद्रतल से ऊंचाई पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है। मंदिर परिसर में मौजूद अखंड ज्योति, प्राचीन कुंड और हिमालय की बर्फीली चोटियों से घिरा शांत वातावरण यहां आने वाले श्रद्धालुओं और नवयुगलों को अलग ही अनुभूति कराता है। आधुनिक डेस्टिनेशन वेडिंग के बीच अब कई लोग पारंपरिक और आध्यात्मिक तरीके से विवाह करने के लिए इस धाम को चुन रहे हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दौरान जो अग्नि प्रज्ज्वलित हुई थी, वह आज भी मंदिर परिसर में अखंड रूप से जल रही है। इस दिव्य अग्नि को “धनंजय अग्नि” कहा जाता है। मान्यता है कि इसी अग्नि को साक्षी मानकर विवाह करने वाले दंपत्तियों को सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि यहां सात फेरे लेने के लिए दूर-दूर से जोड़े पहुंच रहे हैं। त्रियुगीनारायण मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से नवयुगल यहां विवाह के लिए आ रहे हैं। सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते प्रभाव ने भी इस स्थान को नई पहचान दिलाई है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक यहां करीब 100 शादियां सम्पन्न हो चुकी हैं। वहीं बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से लगभग 40 नवयुगल विवाह बंधन में बंध चुके हैं। आने वाले महीनों के लिए भी बड़ी संख्या में बुकिंग और पूछताछ जारी है।

त्रियुगीनारायण मंदिर अब धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विवाह स्थलों की सूची में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यहां पहुंचने वाले लोग केवल विवाह ही नहीं, बल्कि शादी की सालगिरह और विशेष पूजा-अर्चना के लिए भी इस धाम का रुख कर रहे हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम इस स्थल को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक चर्चा का विषय बना रहा है। जिस पवित्र भूमि पर भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था, उसी भूमि पर आज हजारों नवयुगल अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।