तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर शिक्षकों को चयन व प्रोन्नत वेतनमान का लाभ, शासन ने जारी किया आदेश..
उत्तराखंड: राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों को लंबे समय बाद बड़ी राहत मिली है। तदर्थ आधार पर कार्यरत रहे शिक्षकों की सेवा अवधि को अब चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान का लाभ देने के लिए जोड़ा जाएगा। इस संबंध में शासन ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है। बता दे कि राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) को शीर्ष अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह रास्ता साफ हुआ है। कोर्ट के निर्णय के बाद शासन ने पूर्व में जारी विवादित आदेश को प्रभावहीन मानते हुए शिक्षकों के हित में नया निर्णय लिया है। वर्ष 2006 में शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) और प्रवक्ता पदों पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की तदर्थ नियुक्तियां की गई थीं। इन शिक्षकों ने वर्षों तक विद्यालयों में सेवाएं दीं। बाद में वर्ष 2013 में इन्हें नियमित किया गया और इसके बाद वर्ष 2016 में चयन वेतनमान भी स्वीकृत किया गया। हालांकि वर्ष 2018 में शासन द्वारा एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि तदर्थ सेवा अवधि को किसी भी प्रकार के वित्तीय लाभ चाहे वह चयन वेतनमान हो या प्रोन्नत वेतनमान में शामिल नहीं किया जाएगा।
इस आदेश के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हुए और उन्होंने न्यायालय की शरण ली। मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां राज्य सरकार की ओर से दायर एसएलपी को खारिज कर दिया गया। इसके बाद शासन को अपना रुख बदलना पड़ा और अब शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि तदर्थ सेवाओं को जोड़ते हुए ही शिक्षकों को चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इस फैसले से सैकड़ों शिक्षकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। शिक्षक संगठनों ने शासन के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे वर्षों की लड़ाई के बाद मिली जीत बताया है। उनका कहना है कि तदर्थ अवधि में भी शिक्षकों ने पूरी निष्ठा से कार्य किया, ऐसे में उस सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं था। अपर सचिव एमएम सेमवाल ने आदेश में कहा कि चयन, प्रोन्नत वेतनमान इस प्रतिबंध के साथ देने की अनुमति दी जाती है कि इसे अन्य विभागों के मामले में नहीं देखा जाएगा। शिक्षकों को लंबे संघर्ष के बाद चयन, प्रोन्नत वेतनमान का लाभ मिला है। दुखद यह है कि हर मामले के लिए शिक्षकों को कोर्ट जाना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से न केवल शिक्षकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि इससे विभागीय मनोबल भी बढ़ेगा। अब प्रभावित शिक्षक जल्द ही संशोधित वेतन निर्धारण और एरियर के भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं।

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