तुंगनाथ-चोपता में तूफान बना काल, दो सगे भाइयों की मौत, कई लोगों का रेस्क्यू..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शुक्रवार को मौसम ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया। रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल तुंगनाथ और चोपता क्षेत्र में आए तेज तूफान, आंधी और खराब मौसम ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। कुछ ही मिनटों में मौसम पूरी तरह बदल गया और क्षेत्र में मौजूद पर्यटक तथा स्थानीय लोग मुश्किल परिस्थितियों में फंस गए। इस दौरान हुए हादसे में लखनऊ के दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार दोपहर बाद अचानक मौसम खराब होने लगा और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ बारिश तथा तूफान ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तुंगनाथ ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग रास्तों में फंस गए, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को शाम करीब चार बजे सूचना मिली कि तुंगनाथ-चोपता मार्ग पर कई लोग खराब मौसम के कारण संकट में फंस गए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया और डीडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार खराब हो रहे मौसम के बावजूद बचाव दलों ने तेजी से अभियान चलाया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों को बचाव दल ने स्ट्रेचर और अन्य संसाधनों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया, जहां से उन्हें उपचार के लिए ऊखीमठ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
इस हादसे में सबसे दुखद घटना लखनऊ के रहने वाले दो सगे भाइयों की मौत रही। मृतकों की पहचान अभिषेक वाजपेयी और अभिनव वाजपेयी के रूप में हुई है। दोनों भाई उत्तराखंड भ्रमण और तुंगनाथ दर्शन के लिए आए थे। अचानक आए तूफान और प्रतिकूल मौसम की चपेट में आने से उनकी जान चली गई। हादसे में राजन मिश्रा और शुभम शुक्ला नामक दो अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है। पुलिस और प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि खराब मौसम के कारण यह हादसा हुआ। मृतकों के शवों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और प्रभावित परिवारों से संपर्क किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल रहा है और आने वाले दिनों में भी ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं। इसलिए यात्रियों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होने की स्थिति में ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इधर, चमोली जिले में भी मौसम के अचानक बदले मिजाज का असर देखने को मिला। दोपहर बाद तेज गर्जना, बिजली चमकने और भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया। नारायणबगड़ बाजार से होकर बहने वाला केवर गदेरा तेज बारिश के कारण अचानक उफान पर आ गया। कुछ ही समय में जलस्तर इतना बढ़ गया कि मटमैला पानी पिंडर नदी तक पहुंच गया।
अचानक बढ़े जलस्तर को देखकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि ऐसा महसूस होने लगा मानो मानसून ने समय से पहले दस्तक दे दी हो। बारिश का सकारात्मक असर भी देखने को मिला है। पिछले कई दिनों से विभिन्न क्षेत्रों में धधक रही जंगलों की आग पर काफी हद तक काबू पाया गया है। इसके अलावा लगातार पड़ रही भीषण गर्मी से भी लोगों को राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग ने पर्वतीय जिलों में अगले कुछ दिनों तक मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह जारी की है।

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