जलीय जीवों के लिए खास एंबुलेंस, डॉल्फिन रेस्क्यू में नई तकनीक लागू..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में जलीय जीवों के संरक्षण और उनके त्वरित उपचार के लिए एक नया कदम उठाया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान और टीएस फाउंडेशन इंडिया की साझेदारी में तैयार विशेष डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस को जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने मंगलवार को रवाना किया। यह एंबुलेंस विशेष रूप से जलीय जीवों, खासकर डॉल्फिन और घड़ियाल, के रेस्क्यू और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए डिज़ाइन की गई है। इस एंबुलेंस में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंध किया गया है, जिनमें एक्स-रे, ईसीजी और अन्य जरूरी जांच उपकरण शामिल हैं। इससे रेस्क्यू किए गए जीवों की तुरंत जांच और उपचार संभव हो पाएगा। टीएस फाउंडेशन इंडिया की बायोलॉजिस्ट सुप्रिया दत्ता ने कहा कि उनकी संस्था डॉल्फिन, घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण, अध्ययन और स्वास्थ्य निगरानी के क्षेत्र में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि एंबुलेंस की उपलब्धता से अब रेस्क्यू संचालन और अधिक प्रभावी और तेज हो जाएगा। सुप्रिया दत्ता ने यह भी कहा कि राज्य में डॉल्फिन की आबादी की निगरानी और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नई एंबुलेंस के माध्यम से जलीय जीवन की रक्षा और उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि सरकार जलीय जीवों के संरक्षण को उच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने अधिकारियों और संस्थाओं को निर्देश दिए कि रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए और डॉल्फिन तथा अन्य जलजीवों के स्वास्थ्य पर निरंतर निगरानी रखी जाए।
टीएस फाउंडेशन इंडिया की बायोलॉजिस्ट सुप्रिया दत्ता ने कहा कि उनकी संस्था ने 2013 से अब तक यूपी में 41 डॉल्फिन को रेस्क्यू किया है। पहले यह काम साधारण ट्रक के जरिए किया जाता था, लेकिन अब नई एंबुलेंस से रेस्क्यू प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो जाएगी। इस एंबुलेंस में कई आधुनिक सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। इसमें स्ट्रेचर, 500 लीटर का पानी टैंक और शॉवर की व्यवस्था है ताकि डॉल्फिन के शरीर पर लगातार पानी का छिड़काव किया जा सके और उसे प्राकृतिक जलवायु जैसी स्थिति मिले। इसके साथ ही एंबुलेंस में ईसीजी और एक्स-रे जैसी जांच सुविधाएं, ब्लड एनालिसिस उपकरण और पशु चिकित्सक की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। डॉक्टरों के माध्यम से जरूरत पड़ने पर डॉल्फिन का तत्काल इलाज भी किया जा सकेगा।
टीएस फाउंडेशन इंडिया की सुप्रिया दत्ता ने कहा कि यह एंबुलेंस अपने तरह की पहली और अनूठी पहल है, जो जलीय जीवों के संरक्षण और रेस्क्यू के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। भारतीय वन्यजीव संस्थान के डॉ. विपल मौर्य ने कहा कि यूपी की नदियों और नहरों में कई बार डॉल्फिन फंस जाती हैं, खासकर जब पानी कम होता है। ऐसे मामलों में उनका रेस्क्यू करना जरूरी हो जाता है। अब इस एंबुलेंस के जरिए डॉल्फिन को तुरंत और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल डॉल्फिन और जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि लोगों में जलीय जीवन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

More Stories
नीति आयोग की रैंकिंग में उत्तराखंड शीर्ष पर, निर्यात तैयारी में देशभर में पहचान..
जमीन विवादों के त्वरित समाधान के लिए बड़ा फैसला, एक माह का विशेष अभियान शुरू..
एलटी सहायक अध्यापक पदों की लिखित परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख को होगा एग्जाम..