January 9, 2026

चारधाम मार्गों पर सुरक्षा की नई व्यवस्था, 10 डिजास्टर शेल्टर का होगा निर्माण..

चारधाम मार्गों पर सुरक्षा की नई व्यवस्था, 10 डिजास्टर शेल्टर का होगा निर्माण..

 

 

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और हर परिस्थिति में सुगम बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। यात्रा मार्गों पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार 10 विशेष शेल्टर का निर्माण कराने जा रही है, जिनका उपयोग खराब मौसम, भूस्खलन या अन्य आपदाओं के दौरान श्रद्धालुओं के अस्थायी ठहराव के लिए किया जाएगा। यह परियोजना वर्ल्ड बैंक की सहायता से संचालित की जा रही है, जिसके तहत कुल 39 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रस्तावित शेल्टर ऐसे रणनीतिक स्थानों पर विकसित किए जाएंगे, जहां अक्सर मौसम या भौगोलिक कारणों से यात्रा बाधित होती है। इन शेल्टरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण, प्राथमिक सुविधाएं और राहत मिल सके।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में यात्रियों को खुले में या असुरक्षित स्थानों पर रुकने के लिए मजबूर न होना पड़े। सरकार शेल्टरों के संचालन और रखरखाव के लिए एक स्पष्ट नियमावली भी तैयार कर रही है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन संरचनाओं का उपयोग केवल यात्रा अवधि तक सीमित न रहे, बल्कि वर्षभर आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए भी किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था चारधाम यात्रा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य की तैयारियों को नई मजबूती देगी। आने वाले समय में इस पहल को अन्य संवेदनशील पर्वतीय मार्गों तक भी विस्तारित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने उड़ीसा में सफलतापूर्वक संचालित डिजास्टर शेल्टर मॉडल को आधार बनाते हुए प्रदेश में आधुनिक शेल्टर निर्माण का निर्णय लिया है। ये शेल्टर न केवल चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सहायक होंगे, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में आम जनता के लिए भी उपयोग में लाए जा सकेंगे। प्रस्तावित शेल्टरों को मल्टीपरपज हॉल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि सामान्य परिस्थितियों में भी इनका उपयोग सामाजिक, प्रशासनिक या सामुदायिक गतिविधियों के लिए किया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ये संरचनाएं वर्षभर सक्रिय रहें और स्थानीय लोगों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हों।

शेल्टर निर्माण को लेकर जिलों से भूमि संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। कार्यकारी संस्था द्वारा इन प्रस्तावित स्थलों का तकनीकी और भौगोलिक परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद आपदा की दृष्टि से सुरक्षित और रणनीतिक रूप से उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा। इसके पश्चात विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रत्येक डिजास्टर शेल्टर को इस तरह से डिज़ाइन किया जाएगा कि आपात स्थिति में लगभग 400 लोगों को सुरक्षित रूप से ठहराया जा सके। इनमें बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सुरक्षा और राहत से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी। अधिकारियों का कहना है कि शेल्टरों की संरचना ऐसी होगी, जिससे वे भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी प्रभावी रूप से काम कर सकें। राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से चारधाम यात्रा मार्गों पर आपदा प्रबंधन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संकट के समय सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सकेगा। यह योजना उत्तराखंड को आपदा से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।