February 14, 2026

वनाग्नि नियंत्रण को मिलेगी नई ताकत, एनडीएमए ने दी 16.39 करोड़ की मंजूरी..

वनाग्नि नियंत्रण को मिलेगी नई ताकत, एनडीएमए ने दी 16.39 करोड़ की मंजूरी..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने राज्य को वनाग्नि प्रबंधन और नियंत्रण कार्यों के लिए 16.39 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने को मंजूरी प्रदान की है। इस संबंध में नई दिल्ली में गृह सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया। बैठक में उत्तराखंड सहित देश के 10 अन्य राज्यों में वनाग्नि नियंत्रण से जुड़े प्रस्तावों और तैयारियों की समीक्षा की गई। राज्य की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद अब वन विभाग को अतिरिक्त संसाधन जुटाने और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था करने में सहूलियत मिलेगी। इसके अतिरिक्त 2.39 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार अपने स्तर से वहन करेगी।
ये जिले सबसे अधिक संवेदनशील

राज्य में पौड़ी, उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत और नैनीताल जिले वनाग्नि की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में चीड़ के जंगलों की अधिकता के कारण गर्मियों के दौरान आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। सूखी पत्तियां और राल युक्त पेड़ आग को तेजी से फैलाने में सहायक होते हैं, जिससे स्थिति कई बार विकराल रूप ले लेती है। वन विभाग ने विशेष रूप से संवेदनशील जिलों में वनाग्नि नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए पिछले वर्ष एनडीएमए को विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। अब इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। बैठक में शामिल मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि नियंत्रण) सुशांत पटनायक ने बताया कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग उपकरणों की खरीद, फायर लाइन निर्माण, प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र सुदृढ़ करने और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने जैसे कार्यों में किया जाएगा।

इस आर्थिक सहयोग से राज्य में वनाग्नि प्रबंधन की क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। समय रहते आग पर काबू पाने, जनहानि और वन संपदा के नुकसान को कम करने तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ जनजागरूकता और स्थानीय सहभागिता भी वनाग्नि नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में आगामी ग्रीष्मकाल को देखते हुए विभाग की तैयारियां और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।