उत्तरकाशी में गुलदार का हमला, दो ग्रामीणों को बनाया निशाना, इलाके में दहशत..
उत्तराखंड: उत्तरकाशी जनपद के बर्नीगाड क्षेत्र में गुलदार के हमले से ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित गंगनानी धारा के जंगलों में बकरी चराने गए जरड़ा गांव के दो ग्रामीणों पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें वन विभाग की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना बुधवार की बताई जा रही है, जब जरड़ा गांव निवासी अभी सिंह पुत्र राम सिंह और पीनाठिया सिंह पुत्र कौंर सिंह रोज़ की तरह यमुनोत्री हाईवे के पास गंगनानी धारा क्षेत्र में अपनी बकरियां चरा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जंगल में पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक अभी सिंह पर हमला कर दिया। गुलदार के हमले से वह जमीन पर गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया।
साथी को बचाने के लिए पीनाठिया सिंह आगे बढ़ा, लेकिन गुलदार ने उस पर भी हमला कर दिया और उसे भी जख्मी कर दिया। दोनों ग्रामीणों के शोर मचाने और आसपास के लोगों के पहुंचने पर गुलदार जंगल की ओर भाग गया। हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और दोनों घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार दोनों घायल खतरे से बाहर हैं, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बर्नीगाड और आसपास के क्षेत्रों में यह गुलदार के हमले की पहली घटना है, जिससे पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया है। ग्रामीणों ने जंगलों में अकेले जाने से परहेज करना शुरू कर दिया है और बच्चों व पशुपालकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। उप प्रभागीय वनाधिकारी अपर यमुना वन प्रभाग साधु लाल पलियाल ने कहा कि घटना को गंभीरता से लिया गया है। पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा और क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष गश्ती दल तैनात किए जाएंगे। साथ ही वन विभाग द्वारा क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाने और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप चौहान ने वन विभाग से मांग की है कि पीड़ित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और क्षेत्र में गुलदार के आतंक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से जंगल क्षेत्र में नियमित गश्त, चेतावनी बोर्ड लगाने और गुलदार को आबादी से दूर रखने के लिए प्रभावी योजना बनाने की मांग की है।

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