चारधाम यात्रा पर हाई अलर्ट, 80 आपदा टीमें, 1200 कैमरे और 15 ड्रोन से निगरानी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर इस बार प्रशासन और पुलिस ने अभूतपूर्व स्तर पर तैयारियां की हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यात्रा मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक और सुदृढ़ बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा को सुरक्षित, सुचारु और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम अंतिम चरण में हैं। इस बार यात्रा मार्ग पर 1250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पूरे रूट पर हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। इनमें से 92 कैमरे सीधे धाम परिसरों में स्थापित किए जाएंगे, जबकि बाकी कैमरे प्रमुख पड़ावों, पार्किंग स्थलों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि आसमान से भी इस बार यात्रा पर कड़ी नजर रखी जाएगी। कुल 15 ड्रोन 24 घंटे सक्रिय रहेंगे, जो लगातार निगरानी कर भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। ड्रोन तैनाती को रणनीतिक तरीके से विभिन्न जिलों में बांटा गया है, 4 ड्रोन हरिद्वार, 2 टिहरी, 3 उत्तरकाशी और 2 चमोली जिले के यात्रा मार्गों पर तैनात रहेंगे। शेष ड्रोन अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकता अनुसार लगाए जाएंगे। यात्रियों की सुविधा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्किंग प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पूरे यात्रा मार्ग पर 45 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहनों के लिए पार्किंग की व्यापक व्यवस्था की गई है। इससे यात्रा के दौरान जाम की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
प्रशासन ने यात्रा मार्ग को बेहतर प्रबंधन के लिए कई हिस्सों में विभाजित किया है। पूरे रूट को 16 जोन, 43 सब-जोन और 149 सेक्टर में बांटा गया है, जहां प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों और पुलिस बल की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय लेना आसान होगा। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरुप ने जानकारी देते हुए कहा कि यात्रा से पहले सभी जिलों में लगातार बैठकें कर तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। यात्रा शुरू होने से सात दिन पहले ही पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी जाएगी, ताकि पूरे मार्ग पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जा सके। इस बार प्रशासन का फोकस केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना भी प्राथमिकता में है। डिजिटल मॉनिटरिंग, बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग, पर्याप्त पार्किंग और सतत निगरानी के जरिए चारधाम यात्रा को एक सुरक्षित और यादगार अनुभव बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही डेंजर जोन, बोटल नेक और ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर वहां भी पर्याप्त फोर्स और उपकरणों सहित कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इस पर बॉटल नेक 52 चिह्नित किए गए हैं। इनमें पांच उत्तराकाशी, छह टिहरी, पांच हरिद्वार, 16 रुद्रप्रयाग, 10 चमोली, दो पौड़ी गढ़वाल और आठ प्वाइंट देहरादून में हैं। कुल 109 लैंड स्लाइड क्षेत्र हैं जिनमें सबसे अधिक टिहरी में 50 क्षेत्र हैं। जबकि, उत्तरकाशी में 20 रुद्रप्रयाग में 13, चमोली में 18 लैंडस्लाइड जोन हैं। सबसे कम पौड़ी में चार और देहरादून में दो लैंड स्लाइड जोन हैं। दुर्घटना संभावित कुल 274 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक हरिद्वार में 69 प्वाइंट हैं। सभी जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगावाए जा चुके हैं।

More Stories
यात्रा से पहले बड़ा झटका, केदारनाथ पैदल मार्ग पर ग्लेशियर टूटा..
चारधाम यात्रा- सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की जांच के लिए आज मॉक ड्रिल..
ग्रामीण विकास को रफ्तार, उत्तराखंड के हर ब्लॉक में तैयार होंगे मॉडल गांव..