May 27, 2026

उत्तराखंड में बाल देखरेख संस्थाओं का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट..

उत्तराखंड में बाल देखरेख संस्थाओं का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट..

शासन ने कसे निगरानी के शिकंजे..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में संचालित सरकारी और गैर सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने और टेक होम राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह तकनीक आधारित करने पर भी जोर दिया गया है। यह निर्णय मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत संचालित मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए गए।

बैठक में टेक होम राशन वितरण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई। अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में राशन वितरण पूरी तरह फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के माध्यम से नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण पहले भी अनियमितताओं और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस पर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टेक होम राशन का शत-प्रतिशत वितरण फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं जल्द पूरी की जाएं।

मुख्य सचिव ने जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उनका कहना था कि विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने से योजनाओं के संचालन में आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकेगा। बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि राज्य के कई आंगनबाड़ी केंद्र अब भी बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में विद्युत एवं पेयजल की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। जिन केंद्रों में ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, उनकी सूची संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।

इसके साथ ही जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है, उनके लिए पुराने पंचायत भवनों के उपयोग का सुझाव दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन पंचायत भवनों का अब उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें मरम्मत और आवश्यक सुधार के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराया जा सकता है। वहीं जो भवन असुरक्षित स्थिति में हैं, उन्हें ध्वस्त कर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए। बाल सुरक्षा और संस्थागत व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग के अंतर्गत संचालित सभी राजकीय और स्वैच्छिक बाल देखरेख संस्थाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे संस्थाओं की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा हो सकेगी और बच्चों की सुरक्षा, पोषण तथा देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।