April 6, 2025

पंचायत चुनाव से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम, प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज़..

पंचायत चुनाव से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम, प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज़..

 

उत्तराखंड: प्रशासनिक व्यवस्था के नए मुखिया की नियुक्ति के बाद उत्तराखंड में अब एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसी महीने वरिष्ठ नौकरशाहों के प्रभारों में बदलाव कर सकते हैं। इस संभावित फेरबदल की ज़द में कुछ जिलाधिकारी भी आ सकते हैं, जिनका स्थानांतरण या प्रभार में बदलाव किया जा सकता है। यह कदम शासन प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में उठाया जा सकता है।

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड की धामी सरकार अब प्रशासनिक फेरबदल की तैयारियों को अंतिम रूप देने जा रही है। हाल ही में वरिष्ठ नौकरशाह आनंद बर्द्धन को मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद उनके पास रहे विभागों का पुनर्वितरण अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को किए जाने की संभावना है। शासन में तैनात तीन प्रमुख सचिव – आर.के. सुधांशु, एल. फैनई और आर. मीनाक्षी सुंदरम – के बीच विभागों का नया आवंटन किया जा सकता है। इस फेरबदल के माध्यम से सरकार प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और समन्वित बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

वरिष्ठ नौकरशाह आनंद बर्धन के मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद अब उनके पास रहे प्रमुख विभागों का पुनर्वितरण शासन में तैनात तीन प्रमुख सचिवों के बीच किया जा सकता है। इसके साथ ही, शासन में कार्यरत अन्य सचिवों को भी नई जिम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं। वहीं, हाल ही में अपर सचिव से सचिव पद पर पदोन्नत हुए अधिकारियों को भी कुछ प्रमुख विभागों का प्रभार दिया जा सकता है, खासकर वे अधिकारी जो फिलहाल सीमित दायित्व संभाल रहे हैं। यह प्रशासनिक फेरबदल शासन की कार्यक्षमता को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

धामी सरकार में जल्द ही एक और प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। अपर सचिव स्तर पर भी कुछ अधिकारियों के विभागीय प्रभारों में बदलाव की संभावना है। शासन के अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के दो-दो जिलों में जिलाधिकारियों के स्थानांतरण की चर्चा भी तेज़ हो गई है। सूत्रों के अनुसार राज्य में पंचायत चुनावों की घोषणा अगले महीने हो सकती है, ऐसे में सरकार प्रशासनिक ढांचे को दुरुस्त करने के उद्देश्य से इस महीने के भीतर ही फेरबदल को अंतिम रूप दे सकती है। यह बदलाव न केवल चुनावी तैयारियों को देखते हुए अहम माना जा रहा है, बल्कि प्रशासनिक कार्यकुशलता को भी प्रभावित कर सकता है।