महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, एकल महिलाओं के लिए नई योजना शुरू..
उत्तराखंड: प्रदेश की एकल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से संचालित “मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना” का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की एकल महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी सकें और अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हों। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने योजना के तहत चयनित 484 लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से तीन करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि की पहली किस्त जारी की। लाभार्थियों को कुल 3 करोड़ 45 लाख 34 हजार 500 रुपये की सहायता प्रदान की गई है। सीएम ने कहा कि अन्य सात जिलों की 540 महिलाओं को भी इसी माह के अंत तक लगभग चार करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन की नई दिशा देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाखों महिलाओं का संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास राज्य की सबसे बड़ी ताकत है, और सरकार उस शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस योजना के दायरे में विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा या किसी भी कारण से अकेले जीवन यापन कर रही महिलाएं शामिल की गई हैं। इसके साथ ही एसिड अटैक पीड़िताएं, आपराधिक घटनाओं की शिकार महिलाएं और ट्रांसजेंडर समुदाय को भी लाभार्थी के रूप में शामिल किया गया है, जिससे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके। सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग पांच लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न व्यवसायों में सक्रिय हैं। इसके अलावा सात हजार से अधिक ग्राम्य संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन महिलाओं को सामूहिक नेतृत्व और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक भी बनेंगी।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा है कि आज के दौर में महिलाओं को केवल औपचारिक सम्मान या प्रतीकात्मक पहल की नहीं, बल्कि ठोस अवसरों और मजबूत मंच की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सोच महिलाओं को सहारा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करना है। मंत्री ने कहा कि महिलाओं को उपकार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास चाहिए; सीमित दायरे नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के लिए खुला आकाश चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें और जीवन में नई ऊंचाइयों को छू सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राज्य तीनों का विकास सुनिश्चित होता है। इसी सोच के साथ विभाग महिलाओं के लिए स्वरोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान विभागीय सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंसीलाल राणा, उपनिदेशक विक्रम सिंह, आरती बलोदी, नीतू फुलेरा, मोहित चौधरी सहित कई अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
योजना पर मिलेगी 75 प्रतिशत सब्सिड़ी..
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को महिला उद्यमिता की दिशा में एक सशक्त पहल बताते हुए सचिव चंद्रेश यादव ने कहा कि यह योजना उन महिलाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिन्होंने जीवन में कई संघर्षों का सामना किया है। योजना का उद्देश्य एकल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की राह पर आगे बढ़ाना है। योजना के तहत अधिकतम दो लाख रुपये तक की परियोजना पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जबकि लाभार्थी महिला को 25 प्रतिशत अंशदान स्वयं करना होगा। इस व्यवस्था से महिलाएं कम निवेश में अपना स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी और आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकेंगी। पहले चरण में विभिन्न जिलों की पात्र महिलाओं के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से धनराशि भेजी गई। इनमें बागेश्वर जिले की 42, देहरादून की 191, नैनीताल की 75, पौड़ी की 66, टिहरी की 23 और ऊधम सिंह नगर की 87 महिलाओं को योजना का लाभ मिला। अधिकारियों के अनुसार योजना से लाभान्वित अधिकांश महिलाओं का जीवन अब तक चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा है। धनराशि वितरण कार्यक्रम के दौरान जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने महिलाओं से अपने अनुभव साझा करने को कहा तो कई महिलाएं भावुक हो उठीं। उनका कहना था कि यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का नया आधार है। लाभार्थी महिलाओं ने विश्वास जताया कि अपना रोजगार शुरू करने के बाद वे समाज में सम्मानपूर्वक अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभा पाएंगी। योजना से प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सामाजिक सशक्तीकरण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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