राजाजी और फूलों की घाटी को सुरक्षित करने की तैयारी..
पर्यटन और विकास के लिए बनेंगे नए नियम..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। दोनों संरक्षित क्षेत्रों के लिए ईको-सेंसेटिव जोन (ESZ) के प्रस्ताव पर काम किया जा रहा है। इसके तहत पार्कों के आसपास के संवेदनशील इलाकों का दायरा तय करने, विकास गतिविधियों को नियंत्रित करने और निगरानी की व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में गुरुवार को सचिवालय में प्रमुख सचिव पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें वन विभाग, पर्यटन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों ने प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक में जोनल मास्टर प्लान, निगरानी समिति के गठन और ईको-सेंसेटिव जोन में अनुमन्य व प्रतिबंधित गतिविधियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
राजाजी नेशनल पार्क के प्रस्ताव पर कैबिनेट से मिलेगा मार्गदर्शन
राजाजी नेशनल पार्क के आसपास ईको-सेंसेटिव जोन से जुड़े व्यावहारिक और कानूनी पहलुओं को जल्द स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को इस विषय पर अगली कैबिनेट बैठक में सरकार से मार्गदर्शन लेने को कहा गया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर कानूनी सलाह लेकर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। ईको-सेंसेटिव जोन का उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है, जिनसे पर्यावरण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके तहत क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों के लिए नियम निर्धारित किए जाते हैं।
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को लेकर हुई समीक्षा में पर्यटकों की आवाजाही और क्षेत्र की वहन क्षमता को प्रमुखता से उठाया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यहां पर्यटन गतिविधियों की योजना बनाते समय प्राकृतिक पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके लिए जिलाधिकारी, पर्यटन विभाग और अन्य संबंधित विभागों से रिपोर्ट प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा, ताकि पर्यटन के कारण जैव विविधता और प्राकृतिक वातावरण पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखकर बनेगा प्रस्ताव
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने कहा कि ईको-सेंसेटिव जोन निर्धारित करते समय पर्यावरणीय संवेदनशीलता, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकृति संरक्षण के साथ ग्रामीणों और स्थानीय कारोबारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। इसके अलावा, केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने तथा संबंधित जिलाधिकारियों से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति पर रिपोर्ट लेने को कहा गया है।

More Stories
देहरादून में हादसों पर नहीं लग रहा ब्रेक, आशारोड़ी मार्ग पर 24 घंटे में दूसरा हादसा..
पुलिस विभाग में तबादलों की सूची जारी, कई चौकियों के प्रभारी बदले..
स्कूली बच्चों की पढ़ाई का खर्च होगा कम, मुफ्त किताबों के लिए 124 करोड़ रुपये स्वीकृत..