October 10, 2026

उत्तराखंड के शिक्षक बेटियों को सिखा रहे हुनर, जानें खास वजह..

उत्तराखंड के शिक्षक बेटियों को सिखा रहे हुनर, जानें खास वजह..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूलों की दूरी और दुर्गम रास्ते आज भी बच्चों की पढ़ाई के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली बेटियों के लिए आगे की शिक्षा हासिल करने के लिए गांव से बाहर जाना आसान नहीं होता। ऐसे में पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) भूलीगांव के शिक्षकों ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल शुरू की है। स्कूल में अब बेटियों को पढ़ाई के साथ साइकिल चलाना भी सिखाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उन्हें आवागमन में आसानी हो और उनका आत्मविश्वास बढ़े। इस पहल की शुरुआत कक्षा 11 की अंग्रेजी की पुस्तक में शामिल पाठ समर ऑफ ए ब्यूटीफुल व्हाइट हॉर्स पढ़ाने के दौरान हुई। पाठ में घुड़सवारी का उल्लेख आने पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य आनंद मेहरा ने महसूस किया कि पहाड़ के बच्चों के लिए साइकिल और दोपहिया वाहन चलाना सीखना अधिक उपयोगी साबित हो सकता है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने छात्राओं को कम उम्र में साइकिल चलाना सिखाने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि यदि बेटियां स्कूल के दौरान ही साइकिल चलाना सीख जाएं, तो आगे की पढ़ाई के लिए गांव से कस्बों और शहरों में जाने पर उन्हें सुविधा मिलेगी। साथ ही, भविष्य में स्कूटी या अन्य दोपहिया वाहन सीखने में भी उन्हें आसानी होगी।

शिक्षकों ने मिलकर खरीदीं चार साइकिलें
छात्राओं को साइकिल चलाने का अवसर देने के लिए स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने आपस में धनराशि एकत्र की और चार साइकिलें खरीदीं। अब छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर अभ्यास कर रही हैं। कई छात्राएं स्कूल शुरू होने से आधा घंटा से एक घंटा पहले ही पहुंच जाती हैं, ताकि उन्हें साइकिल चलाना सीखने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। विद्यालय में छह सदन बनाए गए हैं। इन्हीं के आधार पर छात्राओं को अभ्यास का अवसर दिया जाता है, जिससे अधिक से अधिक बेटियां इस गतिविधि में शामिल हो सकें। पहाड़ी इलाकों में खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्तों के कारण साइकिल चलाने का अवसर सीमित रहता है। ऐसे में यह पहल छात्राओं को एक नया कौशल सीखने का मौका दे रही है। उत्तराखंड में कक्षा नौ की छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए 2,850 रुपये की सहायता दिए जाने का भी प्रावधान है। विद्यालय का मानना है कि जहां सड़क और रास्तों की स्थिति अनुकूल है, वहां साइकिल छात्राओं के लिए स्कूल आने-जाने का उपयोगी साधन बन सकती है।

स्कूल को बेहतर बनाने में भी जुटे शिक्षक
जीआईसी भूलीगांव में शिक्षकों का प्रयास केवल साइकिल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विद्यालय परिसर को आकर्षक बनाने के लिए भी उन्होंने अपनी ओर से पहल की है। स्कूल परिसर में झाड़ियों का इस्तेमाल कर ‘जीआईसी भूलीगांव’ लिखा गया है। इसके अलावा शिक्षकों ने आपसी सहयोग से करीब ढाई लाख रुपये जुटाकर एक रंगमंच तैयार कराया, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। छात्राओं को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय के शिक्षक सुबह मैदान में अभ्यास भी कराते हैं। वॉलीबॉल में छात्राओं की रुचि को देखते हुए नियमित प्रशिक्षण शुरू किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम जिला स्तरीय प्रतियोगिता में देखने को मिला, जहां विद्यालय की बालिका वॉलीबॉल टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता में जगह बनाई।

विद्यालय की इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्राओं को पढ़ाई के साथ खेल और व्यावहारिक कौशल में भी आगे बढ़ाना है। साइकिल चलाने की पहल हो या खेलों में प्रशिक्षण, शिक्षकों की कोशिश है कि पहाड़ की बेटियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलें। जीआईसी भूलीगांव के इस प्रयास की विधायक फकीर राम टम्टा, मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत, पूर्व विधायक मीना गंगोला सहित विभिन्न संगठनों ने सराहना की है। सीमित संसाधनों के बीच शुरू की गई यह पहल ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर उभर रही है।