September 17, 2026

महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए आयोग होगा और मजबूत..

महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए आयोग होगा और मजबूत..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बोर्ड बैठक में महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों के संरक्षण और आयोग की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय में हुई बैठक की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। बैठक में आयोग के बढ़ते कार्यभार को देखते हुए 10 नए पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में महिलाओं से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण, जनजागरूकता कार्यक्रमों, विधिक सहायता और महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोग की ओर से बताया गया कि प्रदेश के पर्वतीय, ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रही हैं। इसे देखते हुए आयोग की पहुंच को जिलास्तर तक और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं को समय पर सहायता और न्याय दिलाना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों से महिलाओं का आयोग तक अपनी शिकायतें लेकर पहुंचना इस बात का संकेत है कि आयोग के प्रति उनका भरोसा बढ़ रहा है। बढ़ते मामलों और कार्यभार को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसके तहत 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव बोर्ड ने सर्वसम्मति से पारित किया।बोर्ड बैठक में आयोग के सदस्यों के मानदेय में बढ़ोतरी और स्वच्छता कर्मी के वेतन में वृद्धि से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा प्रदेश के सभी 13 जिलों में आयोग की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए उपाध्यक्षों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिम्मेदारियों के तहत उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग, उपाध्यक्ष चन्द्रकला तिवारी को उत्तरकाशी और चमोली तथा उपाध्यक्ष शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग की ओर से तय किया गया है कि उपाध्यक्ष और सदस्य संबंधित जिलों में नियमित जनसुनवाई के साथ महिला जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेंगी। इसके अलावा वन स्टॉप सेंटरों का निरीक्षण, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों की निगरानी भी की जाएगी।

बैठक में वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, महिला हेल्प डेस्क और साइबर अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए इन व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को भी व्यापक स्तर पर संचालित करने की बात कही गई। कुसुम कंडवाल ने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि प्रदेश की महिलाओं के लिए ऐसा भरोसेमंद मंच तैयार करना है, जहां उन्हें आवश्यकता पड़ने पर समय पर संरक्षण, कानूनी सहायता और न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि आयोग की सफलता तभी मानी जाएगी, जब सीमांत क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों में रहने वाली महिलाओं को भी यह भरोसा हो कि उनकी समस्याओं को सुनने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए राज्य महिला आयोग उनके साथ खड़ा है।