July 29, 2026

मानसून में नहीं रुकेगा इलाज, हेली एम्बुलेंस से लेकर 108 सेवा तक स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार..

मानसून में नहीं रुकेगा इलाज, हेली एम्बुलेंस से लेकर 108 सेवा तक स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के बीच स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में आपात तैयारियां तेज कर दी हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें बंद होने और दूरस्थ गांवों का संपर्क टूटने की आशंका को देखते हुए विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं और हेली एम्बुलेंस को अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के साथ भी समन्वय मजबूत किया गया है। मानसून के दौरान हर वर्ष प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं। ऐसे में दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई बार मरीजों की हालत गंभीर होने के बावजूद सड़कें बंद होने के कारण उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी की है ताकि किसी भी आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विशेष दिशा-निर्देश जारी करते हुए अपने-अपने जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने को कहा है। अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं, आवश्यक उपकरण, आईसीयू बेड और चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी अस्पतालों को किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। विभाग ने गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस और आपदा प्रबंधन के तहत आरक्षित हेलीकॉप्टरों को भी तैयार रखा है। यदि मौसम अनुकूल रहेगा तो दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। वहीं मौसम खराब होने की स्थिति में 108 एम्बुलेंस और विभागीय एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से मरीजों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों, सामान्य चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और फार्मेसी अधिकारियों की तैनाती के साथ-साथ मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, उप जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी अलर्ट पर रखा गया है। सरकारी अस्पतालों के अलावा बड़े निजी अस्पतालों से भी आवश्यकता पड़ने पर सहयोग लेने की रणनीति तैयार की गई है।

एम्बुलेंस सेवाओं को भी मानसून के मद्देनजर पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। विभागीय एम्बुलेंस और 108 आपातकालीन सेवा की सभी गाड़ियों को किसी भी समय रवाना होने के लिए तैयार रखा गया है। साथ ही ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर और बर्न यूनिट्स को भी अलर्ट मोड में रखा गया है ताकि आपदा की स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज मिल सके। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने कहा कि मानसून के दौरान सड़कें बंद होने से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी कठिनाई होती है। ऐसे समय में हेली सेवाएं गंभीर मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होती हैं। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान भी कई श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर के माध्यम से एयरलिफ्ट कर समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के लिए ‘गोल्डन आवर’ बेहद महत्वपूर्ण होता है और हेली एम्बुलेंस इस अवधि में मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है।

उन्होंने बताया कि मानसून को देखते हुए विभाग ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की है और प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी की तैनाती की गई है। ये अधिकारी मानसून और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके अलावा समय-समय पर मॉक ड्रिल भी आयोजित की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी रहे। आवश्यकता पड़ने पर रेडक्रॉस, एनसीसी, आईटीबीपी, सेना और अन्य एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित कर राहत एवं बचाव कार्य किए जाएंगे।

यूकाडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस.एस. टोलिया ने कहा कि पूर्व में आपदा प्रबंधन के तहत तैनात हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सैकड़ों इमरजेंसी हेली मिशन संचालित किए जा चुके हैं। सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर चोट और अन्य आपात स्थितियों में दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आपदा प्रबंधन के तहत गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक हेलीकॉप्टर तैनात रखा गया है। गढ़वाल क्षेत्र में हेलीकॉप्टर यूकाडा के समन्वय में संचालित होगा, जबकि कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अधीन हेलीकॉप्टर आपातकालीन सेवाओं के लिए उपलब्ध रहेगा। हालांकि खराब मौसम के दौरान उड़ान संभव नहीं होने पर सड़क एम्बुलेंस सेवाओं का उपयोग किया जाएगा। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क है और किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम कर लिए गए हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाहे मौसम कितना भी खराब क्यों न हो, किसी भी जरूरतमंद मरीज को समय पर उपचार मिलने में बाधा न आए।