उत्तराखंड में ग्रामीण रोजगार को नई रफ्तार, आज से लागू हुई 125 दिन रोजगार वाली योजना..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (वीबी जी राम जी)’ बुधवार से पूरे प्रदेश में लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का दावा है कि यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विकास और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी प्रभावी भूमिका निभाएगी। नई योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा योजना संचालित की जा रही थी, लेकिन अब उसकी जगह विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना लागू की गई है। सरकार का मानना है कि नई योजना अधिक व्यापक दायरे में काम करेगी और ग्रामीण विकास की जरूरतों के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराएगी।
केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी मंगलवार को गजट अधिसूचना जारी कर योजना को प्रदेश में लागू करने का औपचारिक रास्ता साफ कर दिया। इसके साथ ही संबंधित विभागों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए गए हैं। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें श्रमिकों को केवल पारंपरिक निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। कुल 318 प्रकार के कार्यों को योजना के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इन कार्यों में 97 प्रकार के रिपेयर और मेंटेनेंस से जुड़े कार्य शामिल किए गए हैं। इसके अलावा 88 प्रकार के ग्रामीण आधारभूत ढांचे से संबंधित कार्य भी कराए जाएंगे। इनमें 52 नए निर्माण कार्य और 36 पुनर्निर्माण एवं सुधार कार्य शामिल हैं, जिससे गांवों में सड़कों, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सकेगा। योजना के अंतर्गत 37 प्रकार के आपदा राहत एवं पुनर्वास कार्यों को भी शामिल किया गया है। उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में यह प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के बाद राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने से प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से काम पूरा किया जा सकेगा।
इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 86 प्रकार के ग्रामीण आजीविका आधारित कार्यों को भी योजना में स्थान दिया गया है। वहीं पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 107 प्रकार के जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्य भी कराए जाएंगे। इसमें वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण, तालाबों और जलाशयों का विकास सहित कई गतिविधियां शामिल होंगी। सरकार का मानना है कि विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी तेजी से होगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना लागू होने के बाद संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि पात्र श्रमिकों का समय पर पंजीकरण किया जाए और उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाए। सरकार ने योजना के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

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