चारधाम यात्रा- सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की जांच के लिए आज मॉक ड्रिल..
उत्तराखंड: आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आपदा-प्रबंधन के लिहाज से पूरी तरह तैयार करने के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रदेशभर में एक बड़े स्तर का मॉक ड्रिल आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न एजेंसियों की समन्वय क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को परखा गया। यह मॉक ड्रिल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)एनडीएमए और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA)के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। सुबह करीब 10 बजे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से इसकी शुरुआत की गई, जिसके बाद सात जिलों में एक साथ आपदा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों का अभ्यास किया गया।
ड्रिल के दौरान विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति को जमीन पर उतारा गया। इसमें पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन टीमों और अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और प्रभावी निर्णय क्षमता सुनिश्चित करना था। इस मौके पर आपदा प्रबंधन मंत्रीमदन कौशिक भी मौजूद रहे और उन्होंने पूरी प्रक्रिया का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा जैसे बड़े आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और हर स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना जरूरी है। जिला स्तर पर भी तैयारियों को मजबूत किया गया है। सविन बंसल ने कहा कि मॉक ड्रिल के लिए जिले को नौ जोन और 23 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि हर क्षेत्र में बेहतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए जीआईएस मैपिंग के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों और उपलब्ध संसाधनों का सटीक आंकलन किया गया है, जिससे आपदा के समय तेजी से राहत कार्य संचालित किए जा सकें।
राज्य सरकार ने इस बार चारधाम यात्रा के लिए “जीरो लॉस ऑफ लाइफ” का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने और किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मॉक ड्रिल के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि यात्रा के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कमी न रहे। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अभ्यास न केवल तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि कमियों को पहचानकर समय रहते सुधार करने का भी अवसर देते हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा से पहले किया गया यह मॉक ड्रिल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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