March 31, 2026

कम लागत में ज्यादा मुनाफा, चमोली जिला के किसानों ने अपनाई मशरूम खेती..

कम लागत में ज्यादा मुनाफा, चमोली जिला के किसानों ने अपनाई मशरूम खेती..

 

 

उत्तराखंड: चमोली जिला के गैरसैंण क्षेत्र में स्थित मेहलचौरी इन दिनों मशरूम उत्पादन के चलते चर्चा में है। यहां उद्यान विभाग के सचल दल केंद्र की पहल ने स्थानीय काश्तकारों की आजीविका में नया बदलाव लाना शुरू कर दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद किसान अब वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सफेद बटन मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य भी बेहतर हो रहा है। मेहलचौरी उद्यान सचल केंद्र किसानों के लिए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। केंद्र की देखरेख में काश्तकार आधुनिक तकनीकों से मशरूम उगा रहे हैं। यही वजह है कि आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंचकर मशरूम उत्पादन की जानकारी ले रहे हैं। इस पहल ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खोले हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने का काम किया है।

केंद्र के प्रभारी आशीष कुमार और उनकी टीम किसानों को उत्पादन की पूरी प्रक्रिया सिखा रही है, जिसमें तापमान, नमी और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अब तक करीब एक दर्जन से अधिक किसानों ने मशरूम उत्पादन की इकाइयां स्थापित की हैं और सामूहिक रूप से दर्जनों क्विंटल उत्पादन की दिशा में काम कर रहे हैं। कई किसान इसे व्यावसायिक स्तर पर कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने परिवार के उपयोग के लिए ताजे मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। स्थानीय काश्तकारों का कहना है कि मशरूम उत्पादन कम जगह और कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे यह छोटे किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन रहा है। उत्पादन के अच्छे परिणाम मिलने से किसानों का उत्साह भी बढ़ा है। कुछ किसान अब उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अचार जैसे विकल्पों पर भी काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।

मशरूम को ‘सुपरफूड’ की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, विटामिन, फाइबर और कई महत्वपूर्ण खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। साथ ही यह वजन नियंत्रण और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है। कम कैलोरी और अधिक पोषण के कारण मशरूम स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद लाभकारी है। इसमें सेलेनियम, आयरन, पोटेशियम जैसे खनिज तत्वों के साथ-साथ शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को विभिन्न बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। मेहलचौरी में शुरू हुई यह पहल अब धीरे-धीरे एक मॉडल के रूप में उभर रही है, जहां खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नवाचार जोड़कर किसानों की आय बढ़ाई जा रही है। यदि इसी तरह प्रशिक्षण और बाजार की बेहतर व्यवस्था मिलती रही, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र मशरूम उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।