March 13, 2026

तेजी से बढ़ रहे चारधाम यात्रा के पंजीकरण, 4 लाख का आंकड़ा पार..

तेजी से बढ़ रहे चारधाम यात्रा के पंजीकरण, 4 लाख का आंकड़ा पार..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अब तक चार लाख 44 हजार से अधिक श्रद्धालु आगामी यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि यात्रा को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुचारु तरीके से संचालित किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चारधाम यात्रा का मुद्दा सदन में भी गूंजा। इस दौरान कई विधायकों ने यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं और चुनौतियों को लेकर सरकार से सवाल किए। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सरकार किसी भी श्रद्धालु को चारधाम यात्रा पर आने से नहीं रोकेगी।

सदन में नियम 58 के तहत बद्रीनाथ के विधायक लखपत बुटोला ने यात्रा मार्ग पर आने वाली समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ावों पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्री पांच से छह घंटे तक जाम में फंसे रहते हैं, जिससे न केवल उनकी यात्रा प्रभावित होती है बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं। लखपत बुटोला ने सरकार से मांग की कि चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों के निर्माण पर गंभीरता से काम किया जाए। उनका कहना था कि यदि यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे तो जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है और श्रद्धालुओं को राहत मिल सकती है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चारधाम यात्रा के लिए लागू की गई पंजीकरण व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए। कई श्रद्धालुओं के पास ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था कठिन साबित हो सकती है। ऐसे में सरकार को ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि सभी श्रद्धालु आसानी से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकें।सदन में चर्चा के दौरान विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी चारधाम यात्रा से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर किसी प्रकार की सीमा तय नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना था कि चारधाम यात्रा आस्था का विषय है और हर श्रद्धालु को इसमें भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के यात्रा करने का अवसर मिले।

इन सवालों और सुझावों के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार यात्रा को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2001 में जहां लगभग 10 लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर करीब 51 लाख तक पहुंच गई है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के कारण व्यवस्थाओं को व्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। सुबोध उनियाल ने कहा कि पंजीकरण व्यवस्था का उद्देश्य किसी को रोकना नहीं बल्कि यात्रा को व्यवस्थित बनाना है। जब प्रशासन के पास यात्रियों का पूरा रिकॉर्ड होता है तो भीड़ प्रबंधन में आसानी होती है। इसके अलावा यदि किसी प्रकार की दुर्घटना या आपात स्थिति सामने आती है तो यात्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी आसान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है। यात्रा मार्गों पर पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, यातायात व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संसदीय कार्यमंत्री ने यह भी बताया कि चारधाम यात्रा को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां 31 मार्च तक पूरी कर ली जाएंगी। पेयजल व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए जल संस्थान को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। वहीं सड़क और मार्गों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को भी निर्देशित किया गया है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएं।

इसके साथ ही सरकार यात्रा मार्गों पर कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के कारण यात्रा मार्गों पर कचरे की समस्या भी बढ़ जाती है, इसलिए इस बार स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि चारधाम यात्रा को पहले से अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए। प्रशासन का मानना है कि यदि व्यवस्थाएं बेहतर होंगी तो श्रद्धालुओं का अनुभव भी बेहतर होगा और उत्तराखंड की इस महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा की गरिमा भी बनी रहेगी।