February 24, 2026

शीतकाल में नहीं थमी श्रद्धा, 48 हजार भक्त पहुंचे त्रियुगीनारायण धाम..

शीतकाल में नहीं थमी श्रद्धा, 48 हजार भक्त पहुंचे त्रियुगीनारायण धाम..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल त्रियुगीनारायण मंदिर ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान आस्था और श्रद्धा का नया इतिहास रच दिया है। 24 अक्टूबर से 21 फरवरी तक चली शीतकालीन यात्रा अवधि में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग सात हजार अधिक है। बीते वर्ष शीतकालीन दर्शन का आंकड़ा करीब 40 हजार के आसपास था, जो इस बार उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड अग्निकुंड को उस दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है, जो युगों से निरंतर प्रज्वलित है। श्रद्धालु इस पावन अग्नि को साक्षी मानकर वैवाहिक सुख, समृद्धि और मंगलकामनाओं की प्रार्थना करते हैं। यही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व इस मंदिर को अन्य तीर्थस्थलों से विशिष्ट बनाता है।

वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में राष्ट्रीय पहचान..

पिछले कुछ वर्षों में त्रियुगीनारायण मंदिर ने “वेडिंग डेस्टिनेशन” के रूप में देशभर में खास पहचान बनाई है। शुभ मुहूर्तों में यहां विवाह के लिए लंबी बुकिंग सूची देखी जा रही है। इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर भी रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए, जिससे मंदिर की लोकप्रियता और बढ़ी है। नवविवाहित जोड़े यहां विवाह को आध्यात्मिक आशीर्वाद से जोड़कर जीवन की नई शुरुआत करना शुभ मानते हैं। आमतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान तीर्थाटन की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, लेकिन त्रियुगीनारायण मंदिर में इस बार तस्वीर अलग रही। बर्फीली ठंड और कठिन मौसम के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। शीतकालीन यात्रा में बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि मंदिर की आस्था और लोकप्रियता लगातार विस्तार पा रही है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे बेहतर सड़क संपर्क, ऑनलाइन सूचना और बुकिंग प्रणाली की सुविधा तथा वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ती लोकप्रियता प्रमुख कारण हैं। प्रशासन और स्थानीय प्रबंधन द्वारा सुविधाओं में सुधार से भी यात्रियों का विश्वास बढ़ा है। श्रद्धालुओं और विवाह समारोहों की बढ़ती संख्या का सीधा लाभ स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, पंडिताई व्यवस्था और परिवहन क्षेत्र को मिला है। शीतकाल में भी बाजारों में रौनक बनी रही, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष की शीतकालीन यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि आस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं का संतुलित समन्वय किसी भी तीर्थस्थल को वर्षभर जीवंत बनाए रख सकता है।