पहाड़ों में दौड़ेगी विकास की रेल, 40,384 करोड़ से तैयार होगा 216 किमी ट्रैक..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम रेल परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में चारधाम रेल कनेक्टिविटी के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, जिसे इस महत्वाकांक्षी योजना की आधारशिला माना जा रहा है। संसद में उत्तराखंड से सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में रेल मंत्री ने कहा कि राज्य में कुल 216 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइनों को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर लगभग 40,384 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। इनमें से 16 किलोमीटर रेलखंड पर संचालन शुरू किया जा चुका है, जबकि मार्च 2025 तक करीब 19,898 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इससे स्पष्ट है कि परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। करीब 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को चारधाम रेल परियोजना की रीढ़ माना जा रहा है। यह रेलमार्ग देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा। इस लाइन के निर्माण से देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सीधे ऋषिकेश से जुड़ जाएंगे, जिससे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों से यात्रा और अधिक सुगम हो सकेगी। माना जा रहा है कि इससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चारधाम के शेष धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। आगे की प्रक्रियाएं तकनीकी आकलन और स्वीकृतियों के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएंगी। यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच विकसित की जा रही है। प्रस्तावित रेल मार्ग मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) जैसे भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के समीप से गुजरेगा। ऐसे में निर्माण कार्य में उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग मानकों और विशेष सुरक्षा प्रावधानों को अपनाया जा रहा है, ताकि परियोजना दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। चारधाम रेल परियोजना को उत्तराखंड के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। सड़क मार्ग पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी यह रेल नेटवर्क अहम भूमिका निभा सकता है। राज्य के लिए यह परियोजना बहुप्रतीक्षित रही है और इसके पूर्ण क्रियान्वयन को उत्तराखंड के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि निर्धारित समयसीमा में कार्य आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में चारधाम यात्रा की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

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