January 27, 2026

आयुष्मान योजना में बड़ा बदलाव, अब कुछ जरूरी सर्जरी योजना के तहत मुफ्त नहीं होंगी..

आयुष्मान योजना में बड़ा बदलाव, अब कुछ जरूरी सर्जरी योजना के तहत मुफ्त नहीं होंगी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम योजनाओं के संचालन में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सरलता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। राज्य शासन की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि बदलावों का मुख्य उद्देश्य योजनाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाना, भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट करना और सिस्टम को अधिक संगठित बनाना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने कई प्रोत्साहन राशि (Incentives) और विभिन्न दरों के कारण संचालन व्यवस्था जटिल हो गई थी, जिससे निगरानी और नियंत्रण में कठिनाई पैदा हो रही थी।

इसे ध्यान में रखते हुए अब यह व्यवस्था बदल दी गई है।नई नीति के तहत हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में स्थित EHCPS सूचीबद्ध अस्पतालों को मिलने वाली 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि अब समाप्त कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि इन जिलों में स्थित अस्पतालों को पहले मिलने वाला अतिरिक्त आर्थिक लाभ अब नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस बदलाव से योजनाओं की कार्यप्रणाली और अधिक संगठित और पारदर्शी होगी। इसके साथ ही वित्तीय संसाधनों का समान और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस सुधार से योजनाओं की निगरानी आसान होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सकेगा। इसके साथ ही भुगतान प्रक्रिया सरल होगी और अस्पतालों के लिए नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट रूप से लागू होंगी। उत्तराखंड में PM-JAY और अटल आयुष्मान योजना के इस बदलाव को स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक और दूरगामी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य के लाभार्थियों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

NABH अस्पतालों को भी नहीं मिलेगा अतिरिक्त इंसेंटिव

उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और वित्तीय अनुशासन को मजबूत बनाने के लिए अटल आयुष्मान योजना और NABH अस्पतालों के इंसेंटिव में बड़े बदलावों की घोषणा की है। नए शासनादेश के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य इलाकों में एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को मिलने वाली 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राहत की संभावना बनी रह सकती है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और संचालन को बनाए रखना है।शासनादेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अलग-अलग पैकेज दरों पर मिलने वाले मल्टीपल इंसेंटिव अब समाप्त कर दिए जाएंगे। अब नई व्यवस्था के तहत एक ही श्रेणी में अधिकतम अनुमन्य प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस बदलाव से भुगतान प्रक्रिया सरल होगी और नियम पूरे राज्य में समान रूप से लागू होंगे।

राज्य पोषित अटल आयुष्मान योजना में सबसे अहम बदलाव यह है कि अब मोतियाबिंद (Cataract) सर्जरी को योजना से बाहर कर दिया गया है। इससे स्वास्थ्य लाभार्थियों के लिए मोतियाबिंद सर्जरी की लागत अब योजना के तहत कवर नहीं होगी। सरकार ने राहत की जानकारी भी दी है कि किडनी डायलिसिस उपचार योजना में पहले की तरह जारी रहेगा। इस निर्णय से जीवनरक्षक उपचार प्रभावित नहीं होंगे और लाभार्थियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलती रहेगी। अटल आयुष्मान योजना के तहत अब ईएसआई (ESI) कार्ड धारक योजना से अलग किए जाएंगे। इसका मतलब है कि ESI लाभार्थियों को अब राज्य पोषित अटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज का लाभ नहीं मिलेगा। इस बदलाव के बाद कई परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ सकता है। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि यह बदलाव योजनाओं के संगठन, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। नए नियमों से भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट होगी, अस्पतालों को मिलने वाले इंसेंटिव समान होंगे और सिस्टम में निगरानी आसान होगी। राज्य सरकार के इस निर्णय को स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में संगठित सुधार और स्थायी नियंत्रण के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब आयुष्मान भारत (PM-JAY) और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना को Insurance Mode में संचालित किया जाएगा। शासनादेश में कहा गया है कि इस बदलाव के तहत बीमा कंपनियों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए RFP (Request for Proposal) तैयार कर शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली से योजना संचालन में अनुशासन और वित्तीय नियंत्रण बढ़ेगा। साथ ही शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में राज्य द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भुगतान प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और अनुशासित बन सकेगी।

मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा के प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम योजना के संचालन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा। उनका कहना है कि इस बदलाव से वित्तीय अनियमितताओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा और सिस्टम सरल होने के कारण लाभार्थियों और अस्पतालों दोनों के लिए स्पष्टता बढ़ेगी। राज्य सरकार का मानना है कि Insurance Mode में योजनाओं का संचालन करने से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि भुगतान और वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, इस बदलाव से लाभार्थियों को भी साफ और निष्पक्ष सेवा मिलेगी और अस्पतालों के लिए नियम स्पष्ट होंगे। उत्तराखंड में इस नीति बदलाव को स्वास्थ्य क्षेत्र में संगठित सुधार और स्थायी वित्तीय नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है।