January 26, 2026

79 स्कूल भवन ध्वस्तीकरण के दायरे में, डीएम सविन बंसल ने जारी किया एक करोड़ का बजट..

79 स्कूल भवन ध्वस्तीकरण के दायरे में, डीएम सविन बंसल ने जारी किया एक करोड़ का बजट

 

 

उत्तराखंड: देहरादून जिले में स्कूली छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले के ऐसे 79 सरकारी स्कूल भवन, जो लंबे समय से पूरी तरह जर्जर होकर छात्रों के लिए खतरा बने हुए थे, उन्हें ध्वस्त किए जाने का निर्णय लिया गया है। इनमें से 63 स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था पहले ही कर ली गई है, जिसके चलते इन भवनों को तत्काल प्रभाव से गिराया जाएगा। शेष 16 स्कूलों में पहले छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, उसके बाद ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस अभियान के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कुल एक करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सात दिन के भीतर सभी चिह्नित स्कूल भवनों का विस्तृत एस्टीमेट तैयार कर प्रशासन को उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में कई स्कूल भवन ऐसे हैं, जो वर्षों पुराने होने के कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से जर्जर हो चुके हैं। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग से सभी स्कूलों की स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद विभागीय सर्वे कराया गया, जिसमें कुल 104 स्कूल भवनों का निरीक्षण किया गया। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 79 स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर पाए गए हैं, जबकि 17 स्कूल आंशिक रूप से जर्जर हैं और उनमें मरम्मत व सुधार की आवश्यकता है। वहीं आठ स्कूल ऐसे हैं, जिनकी स्थिति फिलहाल सुरक्षित पाई गई है और जिनमें ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं है।प्रशासन ने पहले ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि जर्जर स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षण सत्र के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न हो। इसी के तहत 63 स्कूलों के छात्रों के लिए वैकल्पिक कक्षाओं या नजदीकी विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था कर दी गई है। इन स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त किया जाएगा।

जिन विद्यालयों में अभी वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था नहीं हो पाई है, वहां पहले उपयुक्त विकल्प तलाशा जाएगा। इसके बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। आंशिक रूप से जर्जर स्कूल भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक मरम्मत की जाएगी और जोखिमपूर्ण हिस्सों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण या असुरक्षित भवनों में शिक्षण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन इस पूरे अभियान को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से पूरा करेगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।