ट्रैकिंग होगी नियमों के दायरे में, वन और पर्यटन विभाग बना रहे हैं नई एसओपी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में ट्रैकिंग गतिविधियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ट्रैकिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ उससे जुड़े नियमों को सख्त करने की तैयारी में है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग और वन विभाग मिलकर ट्रैकिंग के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहे हैं, जो भविष्य में ट्रैकिंग से जुड़ी सभी गतिविधियों का आधार बनेगी। प्रस्तावित एसओपी के लागू होने के बाद राज्य में ट्रैकिंग केवल तय नियमों और मानकों के तहत ही की जा सकेगी। इसके अंतर्गत ट्रैकिंग कराने वाले टूर ऑपरेटर और ट्रैकिंग पर जाने वाले व्यक्तियों/दलों दोनों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। नई व्यवस्था के तहत ट्रैकिंग कराने वाले सभी टूर ऑपरेटरों को पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के लिए सरकार की ओर से कुछ तय मानक निर्धारित किए जाएंगे। इनमें टूर ऑपरेटर के पास उपलब्ध आवश्यक उपकरण, संसाधन, सुरक्षा इंतजाम, कार्य अनुभव और प्रशिक्षित स्टाफ की जानकारी शामिल होगी। इसके साथ ही ट्रैकिंग कराने वाले गाइड की योग्यता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गाइड का प्रशिक्षण, पूर्व अनुभव और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता पंजीकरण प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगी।
पंजीकरण को स्थायी न रखते हुए, एक निश्चित अवधि के बाद उसका नवीनीकरण भी जरूरी किया जाएगा, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। एसओपी में ट्रैकिंग पर जाने वाले व्यक्तियों के लिए भी कई अहम प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इसमें ट्रैक की ऊंचाई और कठिनाई के अनुसार आयु सीमा तय करने पर मंथन चल रहा है। यानी अधिक ऊंचाई वाले और कठिन ट्रैक के लिए उम्र की अलग-अलग सीमा हो सकती है। इसके साथ ही ट्रैकिंग पर जाने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। संभावना है कि ट्रैकिंग से पहले स्वास्थ्य संबंधी प्रमाण और एक हलफनामा देना अनिवार्य किया जाए। किसी भी आपात स्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंश्योरेंस को भी जरूरी किया जा सकता है। सरकार की मंशा है कि ट्रैकिंग के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जाए और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। एसओपी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ट्रैकिंग गतिविधियां नियंत्रित, सुरक्षित और प्रकृति के अनुकूल तरीके से संचालित हों। अधिकारियों के अनुसार एसओपी लागू होने के बाद बिना पंजीकरण या नियमों का पालन किए ट्रैकिंग कराना संभव नहीं होगा। इससे न केवल पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उत्तराखंड को एक जिम्मेदार और सुरक्षित ट्रैकिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान भी मिलेगी।
आनलाइन अनुमति मिल सकेगी, विभागों को जाएगी सूचना..
ट्रैकिंग से जुड़ी पर्यटन और वन विभाग की अनुमति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की दिशा में तेज़ी से काम चल रहा है। इसके तहत इको टूरिज्म विभाग द्वारा विकसित की जा रही एक एकीकृत वेबसाइट के माध्यम से ट्रैकिंग परमिट जारी करने की योजना है। प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने के बाद ट्रैकिंग के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ट्रैकिंग से जुड़ी सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की जा सकेंगी। इससे न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि ट्रैकिंग गतिविधियों पर बेहतर निगरानी भी संभव हो सकेगी। नई ऑनलाइन प्रणाली की खास बात यह होगी कि जैसे ही किसी ट्रैकिंग दल को परमिट जारी किया जाएगा, उससे संबंधित जानकारी रियल टाइम में संबंधित विभागों तक पहुंच जाएगी। इसमें उस क्षेत्र का जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस और वन विभाग शामिल होंगे। इस व्यवस्था से प्रशासन के पास यह पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी कि कौन सा दल, किस तारीख को, कितने सदस्यों के साथ और किस ट्रैक रूट पर जा रहा है। इससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करना आसान होगा और रेस्क्यू ऑपरेशन में समय की बचत हो सकेगी।
हितधारकों से बातचीत कर सुझाव लेने का निर्देश..
उत्तराखंड में इको टूरिज्म और ट्रैकिंग गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने की दिशा में शासन स्तर पर हाल ही में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में प्रस्तावित ट्रैकिंग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को लेकर विस्तार से चर्चा की गई और इसे अधिक प्रभावी एवं व्यवहारिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के दौरान उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एसओपी केवल नियमों का दस्तावेज न होकर, ज़मीनी हकीकत से जुड़ा होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने निर्देश दिए कि एसओपी तैयार करते समय टूर ऑपरेटरों सहित सभी हितधारकों से संवाद किया जाए और उनके सुझावों को भी इसमें शामिल किया जाए। इससे न केवल एसओपी व्यावहारिक बनेगी, बल्कि इसके क्रियान्वयन में भी आसानी होगी। मुख्य वन संरक्षक (इको टूरिज्म) प्रसन्न पात्रो ने कहा कि ट्रैकिंग से जुड़ी एसओपी को तैयार किया जा रहा है, हालांकि इसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि एसओपी का उद्देश्य ट्रैकिंग को सुरक्षित, नियंत्रित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, ताकि राज्य में इको टूरिज्म को जिम्मेदार तरीके से बढ़ावा दिया जा सके। अधिकारियों के अनुसार एसओपी लागू होने के बाद ट्रैकिंग गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। टूर ऑपरेटरों की जिम्मेदारी तय होगी, सुरक्षा मानकों को अनिवार्य किया जाएगा और ट्रैकिंग से जुड़ी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी। इससे पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बल मिलेगा।

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